जमरानी बांध के निर्माण को अब भारत सरकार बजट देगी। यह बजट प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मिलेगा। शुक्रवार को केंद्रीय जल संसाधन सचिव की अध्यक्षता व नीति आयोग, केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों की बैठक में इस पर मुहर लग चुकी है। जमरानी बांध परियोजना की लागत में 2584.10 करोड़ खर्च होंगे।
जमरानी बांध का मामला 1975 से चल रहा है। करीब 400 हेक्टेयर जमीन पर इसका निर्माण होना है। जिसमें निजी भूमि का भी बड़ा हिस्सा है। एडीबी की तरफ से बजट को मंजूरी मिलने से लोगों की उम्मीद और बढ़ी थी। क्योंकि, स्थानीय लोग पहले ही प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे चुके थे। पूर्व में धारा आठ के तहत होने वाली सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं | इसके तहत लोगों को बांध निर्माण की जरूरत के साथ विस्थापन को लेकर की जाने वाली कवायद के बारे में विस्तार से बताया गया था। इसके बाद से ग्रामीण धारा 11 लागू करने की मांग कर रहे थे। ताकि अधिग्रहण और विस्थापन को लेकर असमंजस की स्थिति दूर हो सके। मगर एडीबी की ओर से बजट जारी करने से पहले कई आपत्तियां लगाई गई।

शुक्रवार का दिन जमरानी बांध के लिए खास रहा। केंद्रीय जल संसाधन सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में पश्चिम बंगाल, मणिपुर, महाराष्ट्र व उत्तराखंड राज्य की योजनाओं के निवेश पर स्वीकृति हुई। बैठक में तय हुआ कि जमरानी बांध परियोजना पर शीघ्र पुर्नवास सहित अन्य निर्माण कार्य किए जाएंगे। प्रभावितों के पुनर्वास के लिए जल्द पुनर्वास नीति कैबिनेट में स्वीकृत्ति के लिए रखी जाएगी। पुनव्र्यवस्थापन अधिनियम 2013 के प्राविधानों के अनुसार प्रभावित ग्रामीणों को सम्यक रूप से पुनर्वास किया जाएगा।
वर्ष 2027 तक परियोजना पूरा करने का लक्ष्य
जमरानी बांध परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2027 तक रखा गया है। अतिरिक्त सिंचाई के साथ हल्द्वानी शहर को वर्ष 2025 तक 42 एमसीएम पेयजल उपलब्ध कराने का प्राविधान है। साथ ही 63 मिलियन यूनिट वार्षिक विद्युत उत्पादन भी होगा।
रंग लाई केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट की मेहनत
केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने जमरानी बांध के निर्माण के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। प्रेस को जारी बयान में भट्ट ने कहा कि उन की मेहनत अब रंग लाई है। जमरानी बांध के निर्माण के लिए उन्होंने केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन आरके गुप्ता व उत्तराखंड के सिंचाई सचिव हरीश सेमवाल को योजना में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी को भी पत्र लिखा था। भट्ट ने बताया कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना है। इससे लाखों लोगों का हित जुड़ा है|

पूर्व में स्विट्जरलैंड की चार सदस्यीय टीम ने किया था सर्वे
जमरानी बांध क्षेत्र की सुरक्षा और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है। इसलिए इसके सर्वे के लिए स्विट्जरलैंड से चार सदस्यीय टीम दिल्ली पहुंची थी। 31 जनवरी से छह फरवरी 2021 तक सर्वे का काम किया गया था। इस दौरान जमरानी परियोजना के बड़े अफसर और स्थानीय विशेषज्ञ भी साथ रहे थे।
एनओसी के लिए स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड पहुंचा मामला
जमरानी बांध परियोजना को एक पुराने कोरीडोर मामले में एनओसी पाने के लिए प्रस्ताव स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की बैठक में रखना पड़ा। जमरानी बांध क्षेत्र के आसपास 2021 में तीन महीने तक वन विभाग ने वन्यजीवों का मूवमेंट चेक करने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए थे। जिसमें बाघ, हाथी या गुलदार जैसे बड़े वन्यजीवों का मूवमेंट नजर नहीं आया। जिसके बाद महकमे ने जमरानी बांध परियोजना के लिए सहमति भी जता दी।
Date : 11-June-2022
Penned by Reeta Joshi