जब सरकार बेहोश हो जाए और व्यवस्था अंधी बन जाए, तो अपने हक़ की आवाज़ उठाने के लिए सिर्फ़ बड़ों को नहीं, बल्कि मासूम बच्चों को भी सड़कों पर उतरना पड़ता है। बता दें की उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से सामने आया एक वीडियो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। आमतौर पर सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए युवाओं, कर्मचारियों या किसानों को प्रदर्शन करते देखा जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। स्कूल यूनिफॉर्म पहने छोटे-छोटे बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर अपनी ही स्कूल व्यवस्था के खिलाफ नारे लगाते नजर आए। यह सिर्फ एक स्कूल का विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां बच्चों को अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी सड़क पर उतरना पड़े।हाल ही में जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का आंदोलन हुआ था। उसे कुछ ही दिन बीते थे कि अब फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राएं अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बच्चे “हमारी मांगे पूरी करो” के नारे लगा रहे हैं।प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि स्कूल में बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। कक्षाओं में पर्याप्त पंखे नहीं हैं, शौचालय गंदे हैं, बैठने के लिए डेस्क-बेंच की कमी है और पीने के लिए साफ पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य का व्यवहार अभद्र है और जो छात्र उनके खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें फेल करने तक की धमकी दी जाती है। कुछ छात्रों का यह भी दावा है कि विरोध में शामिल होने के लिए बाहर आना चाहने वाले बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।बच्चों के हाथों में मौजूद बैनरों पर लिखा था— “कॉलेज की व्यवस्था सुधारो, बच्चों का भविष्य संवारो।” यह नारा सिर्फ एक मांग नहीं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को भी उजागर करता है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राकेश कुमार ने वीडियो जारी कर छात्रों की मांगों को स्वीकार करने की घोषणा की। प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया कि प्रत्येक कक्षा में चार-चार पंखे लगाए जाएंगे, स्कूल की वायरिंग ठीक कराई जाएगी, एक महीने के भीतर डेस्क-बेंच उपलब्ध कराई जाएगी और छात्रों के लिए आरओ वाटर कूलर भी लगाया जाएगा।इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सरकारी तंत्र तब ही जागता है जब लोग सड़क पर उतरते हैं? और अगर छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रदर्शन करना पड़े, तो यह केवल एक स्कूल की विफलता नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल है।आज की नई पीढ़ी सिर्फ वादे नहीं, जवाबदेही मांग रही है। फतेहपुर के इन बच्चों का प्रदर्शन यह संदेश देता है कि अधिकार उम्र देखकर नहीं मिलते और जब व्यवस्था लंबे समय तक समस्याओं को अनदेखा करती है, तब सबसे मासूम आवाजें भी आंदोलन का रूप ले लेती हैं।