उत्तराखंड में जारी चारधाम यात्रा के बीच उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के मुकाबले यात्रा मार्गों पर उपलब्ध सुविधाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं, जिसके कारण यात्रियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।यूकेडी नेताओं ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की भी मजबूत आधारशिला है। हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव मिले।पार्टी का आरोप है कि यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर पेयजल, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी देखने को मिल रही है।यूकेडी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसलिए आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
पार्टी का कहना है कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त मेडिकल टीम, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत सहायता मिल सके।पार्टी नेताओं ने सरकार से मांग की है कि यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाया जाए, पार्किंग सुविधाओं का विस्तार किया जाए और सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। साथ ही श्रद्धालुओं को मौसम और मार्ग की स्थिति की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराई जाए।यूकेडी का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो यात्रा के चरम सीजन में श्रद्धालुओं की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
पार्टी ने सरकार से चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।हालांकि राज्य सरकार लगातार दावा कर रही है कि चारधाम यात्रा को सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है और यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।