इन दिनों ये फिल्म काफी चर्चा का विषय बनी हुयी है| 11 मार्च को रिलीज हुयी यह फिल्म लगातार बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड बना रही है. इस फिल्म के जरिये लोग पहली बार यह जान पा रहे हैं कि कश्मीरी पंडितो के साथ किस तरह रूह कंपा देने वाले अत्याचार हुए |
लोग इस बात पर यकीन नही कर पा रहे की 32 साल पहले कश्मीरी पंडितो को इतनी भीसण त्रासदी से गुजरना पड़ा था| इस फिल्म में कश्मीरी पंडितो के साथ हुए अत्याचार को एक कहानी के जरिये बताया गया है | इस फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री है, बीते दिनो संसद में इस फिल्म पर पाबन्दी लगाने की मांग की गयी थी | कुछ अन्य लोग भी इसकी मांग कर रहे है
एक समय था जब कश्मीर में फिल्मे बनती थी, फिर आतंकवाद ने सब कुछ बर्बाद कर दिया और 1989-90 के दौरान सैकड़ो कश्मीरी पंडित मारे गए और लाखो पलायन के लिए विवश भी हो गये| धरातल पर तो आज भी कश्मीरी पंडितों की एक बड़ी संख्या बेघर है,बेरोजगार हैं और सबसे शर्मनाक अपने ही देश में शरणार्थी हैं
फिल्म ने इतिहास तो उजागर कर दिया वाहवाही भी लूट ली पर इससे हुआ क्या ? नेताओं ने फिल्म टैक्स फ्री कर दी, मगर कश्मीरी पंडितों की उस संख्या को घर वापस भेजने के लिए किसने क्या कदम उठाये? जनता फिल्म देख के भावुक हुई IMDB पर अच्छी ratings दी. social media पर संवेदनाएं व्यक्त की समय बीतेगा और फिल्म पुरानी हो जाएगी और सब भूल जाएंगे. मगर उन पंडितों का क्या जो आज भी अपने घर अपनी जमीन अपनी नौकरी और अपनी गरिमा के लिए जूंझ रहे हैं|
Edited By- Reeta Joshi