जोशीमठ भू-धंसाव के बाद अब खतरे की जद में नैनीताल

By New31 Uttarakhand

जोशीमठ भू-धंसाव के बाद खतरे की जद में नजर आ रहे नैनीताल शहर को बचाने और भविष्य की निर्माण योजनाओं को तैयार करने के लिए इसका भू-तकनीकी एवं भू-भौतिकीय सर्वेक्षण होगा। इसके अलावा नैनीताल में स्लोप स्थायित्व का भी सर्वेक्षण होगा। इसके लिए भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही शहर का लाइडर मैप भी तैयार किया जाएगा।दरअसल, जोशीमठ भू-धंसाव के बाद सरकार ने तय किया था कि सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का आकलन कराया जाएगा।

इस कड़ी में पहले चरण में 15 शहरों का चयन किया गया था। सबसे पहले नैनीताल की धारण क्षमता के आकलन के साथ ही इसे भू-धंसाव से बचाने के लिए सर्वेक्षण होगा। इसके तहत नैनीताल का लाइडर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) मैप तैयार किया जाएगा। इस तकनीक का उपयोग उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मानचित्र बनाने में किया जाता है।नैनीताल की बुनियाद समझा जाने वाला बलिया नाला लगातार भू-स्खलन की जद में आ रहा है, इसका ट्रीटमेंट भी शुरू किया गया है। वहीं, नैनीताल का शीर्ष नैना पीक, भुजा टिफ्फन टॉप व स्नो व्यू की रमणीक पहाड़ी में भूस्खलन सक्रिय है।

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