आज है विश्व एथलेटिक्स दिवस, न भरपेट खाना न दौड़ने को जूते, सुरेंद्र पांडे के जुनून ने बनाया अंतरराष्ट्रीय धावक

By New31 Uttarakhand

विश्व एथलेटिक्स दिवस हर साल 7 मई को फिटनेस के महत्व के बारे में युवाओं में जागरूकता फैलाने और एथलेटिक्स में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है |  1996 में, विश्व एथलेटिक्स दिवस की शुरुआत तत्कालीन IAAF अध्यक्ष प्रिमो नेबियोलो द्वारा की गई थी | विश्व एथलेटिक्स महासंघ और एथलेटिक्स के क्षेत्र के लिए एक अंतरराष्ट्रीय शासी निकाय, IAAF, फिटनेस और स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ हर साल इस दिन का आयोजन और प्रायोजन करता है |

आज हम आपको नैनीताल जिले के सुरेंद्र पांडे  की कहानी बताने जा रहे है, जिनकी मेहनत और जूनून ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय धावक बनाया और आज वह बतौर सहायक खेल निदेशक कार्यरत हैं | अपने जीवन के संघर्ष की कहानी शेयर करते हुए सुरेंद्र पांडे बताते है कि ; उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा,  पिता सरकारी विभाग में बाबू थे, लेकिन बड़ा परिवार होने पर सारी जिम्मेदारी पिता पर थी । खाना भी भरपेट नहीं मिल पाता था । दौडने  का शौक बचपन से रहा। दौडने  के लिए जूते नहीं होते थे । रानीखेत से अल्मोड़ा तक नंगे पैर दौड़ लगाना शुरू कर दिया ।

 उस दिन गांव में ईंट से लदी गाड़ी आई थी, उसे खाली करने वाला नहीं मिला। मुझे रानीखेत भर्ती में जाना था। मगर परिवार वालों के पास भी रुपये नहीं थे, इसलिए छह रुपये में मैंने पूरी गाड़ी खाली कर दी। अगले दिन रानीखेत गया तो भर्ती हो गया। यह कहना है मूलरूप से तल्ली जोशी खोला व हाल दोनहरिया बलवंत कालोनी निवासी सुरेश पांडे का ।

सुरेंद्र पांडे वर्ष 1981 में आर्मी में भर्ती हो गए। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध भी लड़ा। आर्मी में रहते राष्ट्रीय वह अंतरराष्ट्रीय धावक बन गए। लेकिन पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि कम नहीं हुई। वर्ष 2004 में उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग परीक्षा पास की। सुरेंद्र पांडे आज बतौर सहायक खेल निदेशक कार्यरत हैं ।

थल सेना में भी सुरेश पांडे ने अपना लोहा मनवाया। आपरेशन विजय यानी कारगिल युद्ध 1999 में हिस्सा लेकर दुश्मनों से टक्कर ली। अपनी रेजीमेंट के रणबांकुरों के साथ मिलकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए। अच्छे प्रदर्शन पर वह सिपाही से लेकर सूबेदार तक बने। 1985 व 1989 में उत्कृष्ट पदक से सम्मानित हुए।

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां 

– वर्ष 1985, 1986, 1991 व 1994 में चार बार रथ आल इंडिया मैराथन में स्वर्ण पदक।

– वर्ष 1985 से 1990 में राष्ट्रीय क्रास कंट्री में छह बार स्वर्ण पदक।

– वर्ष 1985 व 1986 में पुणे में अंतरराष्ट्रीय मैराथन में स्वर्ण पदक।

– वर्ष 1994 में मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय मैराथन में स्वर्ण पदक।

Date : 7-मई-2022

Penned by Reeta Joshi

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