बागेश्वर के भैरूचौबट्टा में खड़िया खदान को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। धरने के 21वें दिन आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर प्रदर्शन को दबाने और आंदोलन खत्म कराने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए आमरण अनशन तेज कर दिया है। अब धरना स्थल पर अनशनकारियों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। खनन पट्टाधारक नवीन कुमार भी आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस दिया गया है, जिसमें धरने को अनैतिक बताते हुए CTO और EC के निलंबन का जिक्र किया गया है। हालांकि, आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका धरना CTO या EC के निलंबन को लेकर नहीं, बल्कि प्रशासन की ओर से अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर खनन कार्य में हस्तक्षेप करने के विरोध में है।
आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी और प्रशासन पर खनन पट्टाधारक के दस्तावेजों को सार्वजनिक करने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस पूरे मामले में भारत सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों और उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय के पांच आदेशों का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने प्रशासन से माइंस एक्ट 1952 की धारा 5(1) के तहत अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही धरना स्थल पर संविधान की प्रतियां रखकर ऐलान किया है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को पहले संविधान की शपथ लेनी होगी। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम के बजाय मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से बातचीत की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में आमरण अनशन पर बैठने वालों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। यहां तक कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोग भी अनशन में शामिल होंगे।