एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने पैंगोलिन के शल्क के साथ दो तस्करों को धर दबोचा। टीम ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। वे पैंगोलिन शल्क बेचने नेपाल जा रहे थे।
उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, जिसका 67% भूभाग वनों से ढका हुआ है और यहां पर वन्य जीव भी काफी संख्या में है| जिसके चलते वन्यजीव तस्करों की ओर से संरक्षित प्रजाति के वन्यजीवों की हत्या के मामले लगातार सामने आते रहते हैं | वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए उत्तराखंड वन विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है | ऐसे में बीते दिन खटीमा वन विभाग और एसओजी पुलिस की संयुक्त टीम की ओर से मुखबिर की सूचना पर पहेनिया चौराहे के पास मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को पकड़ा | जिन की तलाशी लेने पर उनके पास से वन्यजीव के अवशेष मिले | इस दौरान वन विभाग और एसओजी की संयुक्त टीम की ओर से सख्ती से पूछताछ करने पर, उन्होंने बताया कि उनके पास से बरामद हुए वन्य जीव के अंग विलुप्त होती दुर्लभ प्रजाति पैंगोलिन उर्फ सल्लू साँप के हैं | पैंगोलिन के शरीर के अंग यौन वर्धक दवाइयों में इस्तेमाल होते हैं और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इनकी कीमत करोड़ों में है | टीम ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। वे पैंगोलिन शल्क बेचने नेपाल जा रहे थे।
एसटीएफ ने कहा कि पूछताछ में पता चला कि पैंगोलिन शल्क करीब एक साल पुराने हैं। आरोपियों ने खटीमा के जंगल से पैंगोलिन का शिकार किया था। पैंगोलिन वन्य जीव शेडयूल-1 की श्रेणी में आता है। दोनों अभियुक्तों पर भारतीय वन अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र में इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में तीन पैंगोलिन और एक किलो छह सौ ग्राम शल्क बरामद किया जा चुका है। पकड़े गए तस्कर बाइक से पैंगोलिन शल्क बेचने के लिए नेपाल जा रहे थे।
Date: 23-अप्रैल-2022
Penned by Reeta joshi