उत्तराखंड में लोक सभा चुनाव के खत्म होने के बाद अब नगर निकाय चुनाव की तैयारी शुरू होने वाली है। बता दे हाईकोर्ट में दिए गए 30 जून तक चुनाव संपन्न कराने के शपथ पत्र के अनुरूप शासन इसकी तैयारियों में जुट गया है। वही मिले संकेतो के अनुसार साफ़ है की 15 मई से पहले 99 नगर निकायों में चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो सकती है। साथ ही बात करे तो राज्य में वर्तमान में 102 नगर निकाय कार्यरूप में प्रणीत है जिनमें से तीन में चुनाव नहीं होते जबकि नए बने आठ अन्य नगर निकायों के चुनाव बाद में कराए जाएंगे। हलाकि राज्य में नगर निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल पिछले वर्ष दो दिसंबर को समाप्त होने के बाद जब चुनाव की स्थिति नहीं बनी तो इन्हें प्रशासकों के हवाले कर दिया गया। वही निकाय अधिनियम के अनुसार प्रशासकों का कार्यकाल छह माह से अधिक नहीं हो सकता जिसकी अवधि दो जून को खत्म हो रही है इसीलिए निकाय चुनाव में विलंब को लेकर हाईकोर्ट में भी एक मामला चल रहा है। सरकार की ओर से कोर्ट में शपथ पत्र दिया गया है कि 30 जून तक निकाय चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे।
यद्यपि, वर्तमान में लोकसभा चुनाव की आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लागू है। ऐसे में अगर नगर निकाय चुनाव होते हैं तो राज्य में दो चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू नहीं हो सकती। अब जबकि राज्य में पहले चरण में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है और चार जून को परिणाम आने हैं, तो ऐसे में कुछ ढील मिल सकती हे। सूत्रों के अनुसार इसी आधार पर शासन की ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र दिया गया। इस सबको देखते हुए शासन अब निकाय चुनाव के कार्यों में जुट गया है। वही महत्वपूर्ण ये है कि इस बार नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण का नए सिरे से निर्धारण होना है। इस सिलसिले में राज्य में गठित एकल समर्पित वर्मा आयोग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुका है। इसके अनुसार राज्य में नगर निकायों में अभी तक निर्धारित ओबीसी आरक्षण की 14 प्रतिशत की सीमा को निकायों की वास्तविक ओबीसी आबादी के हिसाब से तय किया जाना है। जिसमे तमाम निकायों में ओबीसी आरक्षण बढ़ना तय है।