उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों महिला आरक्षण का मुद्दा पूरी तरह गरमा गया है, जहां Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक तरफ बीजेपी खुद को महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी पैरोकार बताकर सड़कों पर उतर रही है, तो वहीं कांग्रेस इसे महज राजनीतिक दिखावा करार दे रही है। देहरादून में बीजेपी द्वारा आयोजित जनआक्रोश रैली और पैदल यात्रा के जरिए सरकार ने महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस ने इस पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि सिर्फ रैली निकालने से महिलाओं का भला नहीं होगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि असली जरूरत महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और बढ़ती महंगाई जैसे जमीनी मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की है, ना कि केवल राजनीतिक संदेश देने की।
वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है और कहा है कि विपक्ष सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इस मुद्दे को हवा दे रहा है। दोनों ही पार्टियां अब सड़कों से लेकर मीडिया तक एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रही हैं—कहीं प्रदर्शन, कहीं बयानबाजी और कहीं रैलियों के जरिए अपनी-अपनी बात जनता तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस ने साफ आरोप लगाया है कि बीजेपी महिला आरक्षण के नाम पर सिर्फ राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, जबकि बीजेपी खुद को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध बता रही है। जिससे साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ एक सामाजिक या नीतिगत बहस नहीं रहा, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का बड़ा मंच बन चुका है, जहां दोनों पार्टियां एक-दूसरे को घेरने और खुद को सही साबित करने में पूरी ताकत झोंक रही हैं।