देहरादून में पुलिस हिरासत के दौरान एक पीआरडी जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे हत्या करार दिया है और मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। घटना शनिवार शाम की बताई जा रही है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।पुलिस के अनुसार, लाडपुर स्थित एक पेट्रोल पंप पर पीआरडी जवान सुनील रतूड़ी शराब के नशे में हंगामा कर रहे थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें वाहन सहित हिरासत में ले लिया। उनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई और उन्हें रायपुर थाना लाया गया। पुलिस का कहना है कि थाने में भी उनके द्वारा हंगामा जारी रखने पर उन्हें हवालात में बंद कर दिया गया।कुछ समय बाद पुलिस ने दावा किया कि सुनील रतूड़ी हवालात में बेहोश अवस्था में मिले। इसके बाद उन्हें तुरंत कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, पुलिस उन्हें शाम 6 बजकर 45 मिनट पर अस्पताल लेकर पहुंची थी, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर मृतक के परिजनों ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि यह आत्महत्या या सामान्य मौत का मामला नहीं, बल्कि पुलिस हिरासत में हत्या है। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें घटना की सूचना देर से दी और वास्तविक स्थिति छिपाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौत पहले ही हो चुकी थी, लेकिन उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमेंद्र डोभाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रायपुर थानाध्यक्ष गिरीश नेगी समेत चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। यह कदम जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।इसके साथ ही प्रशासन ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा कराया जाएगा और इसकी वीडियोग्राफी भी की जाएगी, ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रह सके।यह घटना पुलिस हिरासत में सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह स्पष्ट करेगी कि पीआरडी जवान की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।