मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोमवार से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो गया। इसी दौरान राज्यसभा में विदेश मंत्री S. Jaishankar ने पश्चिम एशिया के हालात पर सरकार का पक्ष रखा। हालांकि जैसे ही वे वक्तव्य देने के लिए खड़े हुए, विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के बीच ही विदेश मंत्री ने अपना वक्तव्य पूरा किया।विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के सभी संबंधित मंत्रालय स्थिति पर लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत प्रभावी कदम उठाए जा सकें।जयशंकर ने बताया कि सरकार ने 20 फरवरी को एक आधिकारिक वक्तव्य जारी कर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि भारत अब भी मानता है कि इस तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे बेहतर रास्ता है।विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री ने स्वयं स्थिति की निगरानी की और संबंधित मंत्रालयों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में स्थिति खराब होने से आम नागरिकों का जीवन और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से पूरा होता है। इसके अलावा भारत का व्यापार भी पश्चिम एशिया के साथ बड़े स्तर पर जुड़ा हुआ है, इसलिए वहां की स्थिति भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।उन्होंने बताया कि सरकार पहले से ही पश्चिम एशिया के हालात पर नजर रख रही है और समय-समय पर भारतीय नागरिकों के लिए परामर्श जारी किए जाते रहे हैं। वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
तेहरान से छात्रों और तीर्थयात्रियों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों से बातचीत की है, ताकि वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को हर संभव सुविधा और सुरक्षा मिल सके। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 67000 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है।जयशंकर ने यह भी बताया कि इस समय Iran से संपर्क करना थोड़ा कठिन है, हालांकि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा जरूरतों के मामले में भी सरकार भारतीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि इस संघर्ष के दौरान 2 भारतीय नाविकों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 1 नाविक अभी भी लापता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है और सुरक्षा स्थिति में काफी गिरावट आई है। इस संघर्ष का असर अन्य देशों में भी दिखाई दे रहा है और सामान्य जीवन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।