नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा सरकार मतदाताओं को रिझाने में जुट गई है। जिसके चलते अब पेयजल के उपभोक्ताओं का विलंब शुल्क माफ किया जा रहा है। जिसके तहत 26 हजार पेयजल उपभोक्ताओं का 24 करोड़ रुपये विलंब शुल्क माफ होगा। हालांकि शासनादेश के मुताबिक पेयजल उपभोक्ताओं के सामने बस एक शर्त है कि अगर वह अपने पानी के बिल की बकाया राशि एकमुश्त जमा कर देते हैं तो इनका शासन की ओर से विलंब शुल्क माफ किया जाएगा। नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता लगने से ठीक पहले ही उत्तराखंड शासन के पेयजल एवं स्वच्छता अनुभाग की ओर से पानी के उपभोक्ताओं को विलंब शुल्क हो गया है। जल संस्थान कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक हल्द्वानी, काठगोदाम, ट्रांसपोर्ट नगर, ऊंचापुल, कालाढूंगी आदि क्षेत्रों में पानी के बकाया राशि के करीब 26 हजार उपभोक्ता हैं।
जिन्होंने कई सालों से पानी का बिल जमा नहीं किया है। बकाया राशि के साथ मिलाकर इन उपभोक्ताओं का विलंब शुल्क 24 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है।जल संस्थान के बकाएदारों में घरेलू, निजी सरकारी विभाग शामिल हैं। जिसके बाद सरकार की ओर से इन लोगों को राहत दी जा रही है। वही विलंब शुल्क लगने का शासनादेश जारी हो गया है। अब जो बकाएदार पानी के बिलों का एकमुश्त (इकठ्ठा) बकाया जमा करेगा। उन लोगों को विलंब शुल्क की छूट दी जा रही है। शासन का यह आदेश 31 मार्च 2025 तक लागू है। अधिशासी अभियंता, जल संस्थान के अधिकारी रवि शंकर लोशाली ने कहा आचार संहिता लगने से पहले ही विलंब शुल्क लगने का शासनादेश जारी हो गया है। अब जो बकाएदार पानी के बिलों का एकमुश्त बकाया जमा करेगा। उन लोगों को विलंब शुल्क की छूट दी जा रही है।