कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री,क्या बदल पाएंगे शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर?

कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री,क्या बदल पाएंगे शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर?
By New31 Uttarakhand

लंबे समय से NEET परीक्षा विवाद, पेपर लीक के आरोपों और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर देशभर के छात्रों और युवाओं में नाराजगी देखने को मिल रही थी। जंतर मंतर में जो हुआ उससे हम सब अच्छे से वाकिफ है ,इसी बीच केंद्र सरकार को फैसला लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ना। अब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।कई छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार उठी आवाज़ों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग के बाद यह बदलाव हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नए शिक्षा मंत्री छात्रों की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे?बता दे की नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं और वर्ष 2004 से लगातार धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं और मोदी सरकार में संसदीय कार्य, कोयला, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, उपभोक्ता मामले तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

प्रह्लाद जोशी ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक किया, जो कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल और आगे की पढ़ाई न्यू इंग्लिश स्कूल, हुब्बली में हुई।

शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालते ही छात्रों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता ला पाएगी और वर्षों से उठ रहे पेपर लीक जैसे मामलों पर प्रभावी रोक लगा सकेगी।छात्रों के बीच सबसे अधिक चर्चा इन सवालों की है—की क्या NEET, CUET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पूरी तरह रोका जा सकेगा?क्या NTA की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार किए जाएंगे?क्या परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी?क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों?क्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा?उम्मीदें बड़ी, चुनौती उससे भी बड़ी प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभालने के बाद कहा है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।हालांकि, छात्रों का मानना है कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत किया जाता है, तभी युवाओं का विश्वास दोबारा कायम हो सकेगा।धर्मेंद्र प्रधान के जाने के बाद शिक्षा मंत्रालय में यह बदलाव एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। लेकिन असली परीक्षा अब प्रह्लाद जोशी की होगी। क्या वे शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार ला पाएंगे? क्या प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक लगेगी? या फिर यह बदलाव भी केवल राजनीतिक फेरबदल बनकर रह जाएगा?इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सरकार के फैसलों और उनके प्रभाव से स्पष्ट होंगे।

Related News

मनोरंजन

News Letter

Your email address will not be this published. Required fields are News Today.