बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सभासद धीरेंद्र परिहार की गुमशुदगी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 17 अक्टूबर से लापता चल रहे धीरेंद्र परिहार का शव मंगलवार शाम 3 नवंबर को गोमती नदी के किनारे थुणाई क्षेत्र से बरामद किया गया। शव मिलने की सूचना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को खाई से बाहर निकाला और जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। परिजनों ने शव की पहचान धीरेंद्र परिहार के रूप में की। इस मामले में पुलिस ने एक महिला समेत दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। शुरुआती जांच में सर्विलांस, कॉल हिस्ट्री और सीसीटीवी फुटेज अहम सुराग बने हैं।
जानकारी के मुताबिक, धीरेंद्र परिहार 17 अक्टूबर को घर से बाजार जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने अपने स्तर पर काफी तलाश की और 31 अक्टूबर को उनकी मां नंदी परिहार ने कोतवाली में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को नुमाइशखेत क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों को जलाने से जुड़ा फुटेज भी मिला। बताया जा रहा है कि फुटेज में एक महिला की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी, जिसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना वाले दिन एक महिला को 16 से 17 बार फोन किए जाने की जानकारी भी सामने आई है, हालांकि पुलिस ने इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
धीरेंद्र का शव मिलने के बाद जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, अधिवक्ता और परिजन जुटे रहे। सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के आधिकारिक खुलासे का इंतजार है। उधर, जिला बार एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे। पुलिस के अनुसार, मौत की असली वजह, वारदात का तरीका और अन्य लोगों की संभावित भूमिका पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पूछताछ के बाद स्पष्ट होगी। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर धीरेंद्र परिहार के साथ क्या हुआ था और इस पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन शामिल है।