सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पहुंची हाईकोर्ट, जबरन अनशन तुड़वाने की मांग

By New31 Uttarakhand

शिक्षा सुधार और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तत्काल सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी हालत गंभीर होती जा रही है और समय रहते चिकित्सकीय हस्तक्षेप जरूरी है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब भी मांगा है।

इस मामले ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या अदालत किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध भूख हड़ताल समाप्त करने का आदेश दे सकती है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो किसी व्यक्ति को जबरन अनशन तोड़ने के लिए बाध्य करे। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति का जीवन गंभीर खतरे में हो, तो अदालत सरकार और संबंधित अधिकारियों को उसकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दे सकती है। अब इस मामले में सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि यह केवल सोनम वांगचुक की सेहत का मामला नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन की रक्षा के संवैधानिक दायित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न भी बन गया है।

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