रुद्रपुर में स्कूली बच्चों का नया कारनामा! App से बीच सड़क रोक रहे E-Rickshaw

By New31 Uttarakhand

ई-रिक्शों से लोगों की शिकायतें नई नहीं हैं। कोई कहता है ये बीच सड़क पर सवारी के लिए रुक जाते हैं, कोई आरोप लगाता है कि ये कहीं भी यू-टर्न मार देते हैं, तो कोई ट्रैफिक जाम की वजह इन्हें मानता है। जनता की ये शिकायतें अपनी जगह सही हो सकती हैं और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि किसी गरीब की रोज़ी-रोटी ही छीन ली जाए? पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें कुछ लोग मोबाइल ऐप की मदद से चलते हुए ई-रिक्शों को रिमोट से बंद कर रहे हैं। किसी के लिए ये महज़ एक मज़ाक या वायरल वीडियो बनाने का जरिया हो सकता है, लेकिन ज़रा सोचिए… जिस इंसान की रोज़ की कमाई उसी ई-रिक्शे पर निर्भर हो, उसके लिए ये मज़ाक नहीं, बल्कि पूरे परिवार की रोटी पर लात मारने जैसा है।

ताज़ा मामला उत्तराखंड के रुद्रपुर से सामने आया है, जहां कुछ स्कूली बच्चों पर मोबाइल ऐप डाउनलोड कर ई-रिक्शों के पहिए रोकने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि बच्चे ऐप की मदद से चलते हुए ई-रिक्शों को अचानक बंद कर रहे थे, जिससे चालक बीच सड़क पर परेशान हो गए और कई जगह यातायात भी प्रभावित हुआ। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। इससे पहले भी देश के कई हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद सरकार ने ऐसे दो ऐप्स को Google Play Store और Apple App Store से हटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन सवाल सिर्फ ऐप का नहीं, सोच का भी है। कई ई-रिक्शा चालक किराये पर गाड़ी लेकर निकलते हैं और दिन खत्म होने पर मालिक को तय रकम हर हाल में देनी पड़ती है। अगर कोई बार-बार उनका ई-रिक्शा बंद कर देगा, तो वो कमाएंगे कैसे… और अपने बच्चों का पेट कैसे भरेंगे? अगर कोई चालक ट्रैफिक नियम तोड़ता है, तो कार्रवाई पुलिस का काम है, न कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज़ के लिए किसी मेहनतकश इंसान की रोज़ी-रोटी से खेलना। कानून का पालन होना चाहिए, लेकिन इंसानियत भी उतनी ही ज़रूरी है।

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