उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में चल रहे विधानसभा के पांच दिवसीय बजट सत्र का चौथा दिन भी विवादों और हंगामे के बीच बीत गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विपक्ष जितनी चर्चा चाहे, सरकार उसका जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पिछले चार वर्षों में सभी काम सही तरीके से किए हैं और सत्र की संख्या भी बढ़ाई गई है।लेकिन विधानसभा की चर्चा और दावों के बीच जनता के हालात बदलते नहीं दिख रहे हैं। विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि अगर सरकार का काम सही है तो जनता क्यों परेशान है और विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं।उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष नेगी और उनके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य के अस्पताल और रेफरल सेंटरों में हालात बेहद खराब हैं। मरीजों की जान जोखिम में है और मौतें बढ़ रही हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अंकिता भंडारी की मौत जैसी घटनाओं को राजनीतिक और सामाजिक तौर पर हल्के में लिया गया और आवाज उठाने वालों को दबा दिया जाता है।विपक्षी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि जब वे प्रदर्शन करते हैं, तो प्रशासन पानी की बौछार जैसी कार्रवाई करके उनका कदम रोकने की कोशिश करता है।जनता का मानना है की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं दिख रहा और स्थानीय मुद्दों पर आवाज दबाई जा रही है।सत्र के दौरान विपक्ष ने स्वास्थ्य, प्रशासन और स्थानीय मुद्दों के अलावा हल्द्वानी के डहरिया हत्याकांड को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि आरोपी पार्षद को बचाने के लिए विधायक थाने तक गए थे। इस मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार ने हर क्षेत्र में काम किया है और विकास योजनाएं लागू की जा रही हैं। लेकिन जनता की नाराजगी, विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजें इस बात को उजागर कर रही हैं कि जमीनी स्तर पर कई समस्याओं का समाधान अभी भी लंबित है।गैरसैंण विधानसभा सत्र में विपक्ष के लगातार प्रदर्शन और सरकार के दावों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या केवल चर्चा और बहस से उत्तराखंड के गंभीर मुद्दे हल हो जाएंगे, या इसके लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।