बैडमिंटन में पहली बार थॉमस कप जीतकर भारत ने रचा इतिहास, अल्मोड़ा के लक्ष्य ने किया कमाल

By New31 Uttarakhand

थॉमस कप के 73 साल के इतिहास में भारतीय टीम पहली बार चैंपियन बनी है| यह टूर्नामेंट 1949 से खेला जा रहा था, लेकिन अब तक इंडोनेशिया, डेनमार्क और मलेशिया जैसी टीमों का इस टूर्नामेंट में दबदबा रहा था | इस साल भारत ने इस दबदबे को खत्म किया है | भारत चौथी टीम है जिसने अब तक यह टूर्नामेंट जीता है |भारतीय बैडमिंटन टीम ने पहली बार थॉमस कप खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है | टीम ने पहली बार फाइनल खिताब जीतकर गोल्ड मेडल जीत लिया है | टीम इंडिया ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए थॉमस कप बैडमिंटन का खिताब जीत लिया है | रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने इंडोनेशिया को 3-0  से मात दी | भारत ने 73 साल के इतिहास में पहली बार इस टूर्नामेंट को जीतने में सफलता हासिल की है | थॉमस कप को पुरुषों का विश्व टीम चैम्पियनशिप भी कहा जाता. है, ऐसे में यह जीत 1983 क्रिकेट विश्व कप जीत जैसी है |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर सभी खिलाड़ियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है | उन्होंने ट्वीट किया, ‘भारतीय बैडमिंटन टीम को ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए बधाई, पूरी टीम को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं. आपकी जीत पर पूरे देश को गर्व है. यह जीत युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगी.’

बैडमिंटन खिलाड़ियों के परिवार से हैं लक्ष्‍य सेन, दादा और पिता के हुनर से चमके

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से निकले लक्ष्य सेन ने कड़े परिश्रम से बैडमिंट की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है। बता दें कि लक्ष्‍य अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उन्होंने अपने दादा और पिता से बैडमिंटन के गुर सीखे हैं। वहीं बड़े भाई चिराग ने भी उन्‍हें आगे बढ़ने के लिए काफी कुछ सिखाया है। घर से ही मिले प्रशिक्षण से लक्ष्य ने 10 वर्ष की उम्र में इजरायल में पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता था।

लक्ष्य मूलरूप से सोमेश्वर (अल्मोड़ा ) के ग्राम रस्यारा के रहने वाले हैं। उनका जन्‍म 16 अगस्त 2001 को हुआ है। लक्ष्य ने 12वीं तक की शिक्षा बीयरशिवा स्कूल अल्मोड़ा से पूरी की। उनके दादा सीएल सेन जिला परिषद में नौकरी करते थे। दादा ने राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए कई पुरस्कार जीते। उन्‍हें बैडमिंटन का भीष्‍म पितामह भी कहा जाता था। लक्ष्य के पिता डीके सेन भी राष्‍ट्रीय स्‍तर बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुके हैं। वह स्पो‌र्ट्स अथारिटी आफ इंडिया में कोच रहे चुके हैं और लक्ष्य के कोच भी वही हैं।

दोनों भाईयों ने भारत को कई खिताब दिलाए

छह वर्ष की आयु से लक्ष्‍म मैदान में उतर गए और पिता व दादा की राह पर चलकर जिला, राज्य के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कई खिताब अपने नाम किए। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नाम कमाया। लक्ष्य के बड़े भाई चिराग सेन भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। दोनों भाईयों ने भारत को कई खिताब दिलाए हैं।चिराग व लक्ष्य की माता निर्मला सेन अल्मोड़ा के निजी स्कूल में शिक्षिका थी। 2018 में पिता डीके सेन ने वीआरएस ले लिया था। निर्मला सेन ने भी स्कूल छोड़ दिया और बच्चों के प्रशिक्षण के लिए परिवार बेंगलुरु शिफ्ट हो गया।

Date : 16-May-2022

Penned by Reeta Joshi

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