जुबिन और असीस को मिला बेस्ट प्लेबै
विश्व पर्यावरण दिवस 2022 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी बचाओ पर आधारित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सदगुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, सद्गुरु और ईशा फाउंडेशन भी आज बधाई के पात्र हैं। मार्च में उनकी संस्था ने Save Soil अभियान की शुरुआत की थी। 27 देशों से होते हुए उनकी यात्रा आज 75वें दिन यहां पहुंची है। आज जब देश अपनी आजादी के 75वे वर्ष का पर्व मना रहा है, इस अमृतकाल में नए संकल्प ले रहा है। तो इस तरह के जनअभियान बहुत अहम हो जाते हैं।
पीएम ने आगे कहा, मुझे संतोष है कि देश में पिछले 8 साल से जो योजनाएं चल रही है, सभी में किसी न किसी रूप से पर्यावरण संरक्षण का आग्रह है। स्वच्छ भारत मिशन हो या waste to wealth से जुड़े कार्यक्रम हो, अमृत मिशन के तहत शहरों में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का निर्माण हो, या सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का अभियान या नमामि गंगे के तहत गंगा स्वच्छता का अभियान, पर्यावरण रक्षा के भारत के प्रयास बहुआयामी रहे हैं। भारत ये प्रयास तब कर रहा है जब Climate Change में भारत की भूमिका न के बराबर है। विश्व के बड़े आधुनिक देश न केवल धरती के ज्यादा से ज्यादा संसाधनों का दोहन कर रहे हैं बल्कि सबसे ज्यादा carbon emission उन्ही के खाते में जाता है।
मिट्टी को बचाने के लिए हमने पांच प्रमुख बातों पर फोकस किया है।
पहला- मिट्टी को केमिकल फ्री कैसे बनाएं।
दूसरा- मिट्टी में जो जीव रहते हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में आप लोग Soil Organic Matter कहते हैं, उन्हें कैसे बचाएं।
तीसरा- मिट्टी की नमी को कैसे बनाए रखें, उस तक जल की उपलब्धता कैसे बढ़ाएं।
चौथा- भूजल कम होने की वजह से मिट्टी को जो नुकसान हो रहा है, उसे कैसे दूर करें।
पांचवा, वनों का दायरा कम होने से मिट्टी का जो लगातार क्षरण हो रहा है, उसे कैसे रोकें।
पीएम मोदी ने कहा, पहले हमारे देश के किसान के पास इस जानकारी का अभाव था कि उसकी मिट्टी किस प्रकार की है, उसकी मिट्टी में कौन सी कमी है, कितनी कमी है। इस समस्या को दूर करने के लिए देश में किसानों को soil health card देने का बहुत बड़ा अभियान चलाया गया। पूरे देश में 22 करोड़ से ज्यादा soil health card किसानों को दिए गए। इसके साथ साथ देश में soil testing से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क भी तैयार हुआ है।
आज देश के करोड़ो किसान soil health card से मिली जानकारी के आधार पर फर्टीलाइजर और माइक्रो न्यूट्रिशन का उपयोग कर रहे हैं। इससे किसानों को लागत में 8 से 10% की बचत हुई है और उपज में 5 से 6% की बढ़ोतरी देखी गई है। मिट्टी को लाभ पहुंचाने में यूरिया की शत प्रतिशत नीम कोटिंग ने भी बहुत लाभ पहुंचाया है। माइक्रो इरीगेशन और अटल भू-योजना की वजह से देश के अनेक राज्यों में मिट्टी की सेहत भी संभल रही है। catch the rain जैसे अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण से देश के जन-जन को जोड़ रहे हैं।
इस साल मार्च में ही देश में 13 बड़ी नदियों के संरक्षण का अभियान भी शुरू हुआ है। इसमें पानी में प्रदूषण कम करने के साथ-साथ नदियों के किनारे वन लगाने का भी काम किया जा रहा है। अनुमान है कि इससे भारत के forest cover में 7,400 स्क्वायर किमी से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी। बीते 8 वर्षों में भारत ने अपना जो forest cover 20,000 स्क्वायर किमी से ज्यादा बढ़ाया है, उसमें ये और मदद करेगा।
Date : 05-June-2022
Penned by Reeta Joshi
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