उत्तराखंड की बहुमूल्य सांस्कृतिक विश्व धरोहर रम्माण का आयोजन हर्षोल्लास से किया गया।बता दें की रम्माण मेला सलूड़ डुंग्रा गांव में प्राचीन काल से मनाया जाता है। इस अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को दो अक्टूबर 2009 को विश्व सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा भी मिल चुका है। नन्दा देवी नेशनल पार्क फूलों की घाटी के बाद उत्तराखंड की यह तीसरी विश्व धरोहर है ,वहीं खराब मौसम के बीच भी सलूड़ डुंग्रा गांव के भूम्याल मंदिर चौक में एक ही दिन में पारम्परिक लोक जागरों के माध्यम से बिना बोले नृत्य नाटकों और मुखौटा के जरिए रम्माण का मेला आयोजित किया गया।
साथ ही आपको बता दें की सीएम पुष्कर सिंह धामी को भी इस मेले में शिरकत करनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर उनका कार्यक्रम रद्द हो गया ,लोक कला संस्कृति केंद्र श्रीनगर के प्रो.डीआर पुरोहित और मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली मेले में बतौर मुख्य अथिति मौजूद रहे,बता दें मंदिर प्रांगण में पूजा अर्चना के बीच रम्माण मेले की शुरुआत हुई। लोक कला संस्कृति केंद्र श्रीनगर के प्रो.डीआर पुरोहित के गाए गए लोक जागरों में रम्माण के पात्रों ने अपना नृत्य दिखाया।
वहीं 18 तालों में राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान समेत रम्माण के अन्य पात्रों ने नृत्य के माध्यम से पूरी रामायण का मंचन किया। इसके अलावा गणेश नृत्य, मोर-मोरिन नृत्य, खिलाड़ी नृत्य, राणी-राधिका नृत्य, बुढ़देवा, नृसिंह प्रहलाद और पांडव नृत्य को देखकर भी दर्शक मंत्र्मुग्द हो गये।वहीं इस मेले को देखने के लिए दर्जनों गांव से भारी भीड़ सलूड़ डुंग्रा गांव में एकत्रित हुई।