पहाड़ों में बने सदियों पुराने कई घर खूबसूरत तो है ही लेकिन इन घरों की कहानी भी बेहद दिलचस्प है ,कहा जाता है कि कत्यूर और चंद राजाओं ने पहाड़ में घरों के निर्माण की ऐसी खूबसूरत शैली को तैयार किया जिसे देख सब मनमोहित हो गये ,हालांकि भौगोलिक परिस्थिति, सीमेंट के घरों के निर्माण और गांवों से लोगों के पलायन ने पहाड़ों में सब कुछ बदल कर रख दिया.बता दें की उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लोगों का रहन सहन, यहां की संस्कृति, परंपरा, जीवन, काफी अलग रहा है. ये सभी तत्व सृष्टि से संतुलन बनाए रखने और प्रकृति से जुड़ने और नजदीक रहने वाले हैं. इसका एक उदाहरण पुराने जमाने में यहां की हाउसिंग कॉलोनी कही जाने वाली बाखली में देखने को मिल जाएगा.
पहाड़ के यह घर कई परिवारों को एकसाथ रहने, एकजुटता और सहयोग की भावना दर्शाते हैं ,लेकिन आधुनिकता के फेर में अब बाखली परिवारों को एकजुट रखने में नाकाम दिख रही है.बता दें की बाखली पहाड़ के घर होते हैं, जिन्हें पारंपरिक तरह से मिट्टी और पत्थरों से मिलकर बनाया जाता है. इन घरों के सुंदर दरवाजे और खिड़कियां पहाड़ के सामूहिकता और समाज को समझाने के लिए काफी हैं. इस बाखली में वास्तुकला, इतिहास, संस्कृति सब एक साथ स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.
लेकिन अब सब बदल गया है हालांकि पहाड़ों में अभी भी आपको कई खूबसूरत घर देखने को मिल जायेंगे लेकिन इनकी संख्या अब कम होने लगी है अब ज्यादातर लोग आज के जमाने के मकान बना कर रहने लगे ,क्योंकि ये बात सभी जानते है की परिवर्तन ही जीवन का नियम है लेकिन जो लोग आज भी पहाड़ों में पाथर से बने घरों में रहा करते है वो लोग इन घरों का सुख और इन घरों में मिलने वाले सुकून से आज भी अच्छी तरहा से परिचित है .