देहरादून के सहसपुर क्षेत्र का बैरागीवाला गांव इन दिनों तनाव और डर के साए में जी रहा है। भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी विनोद कुमार की हत्या के बाद यहां हालात इतने बिगड़ गए कि गांव की तस्वीर ही बदल गई।बताया जा रहा है कि शनिवार को खेत में पानी लगाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के कई लोगों ने विनोद कुमार और उनके भाइयों पर हमला कर दिया।
इस हमले में विनोद कुमार के सिर पर हथौड़े से कई वार किए गए, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जबकि उनके भाई अशोक और राजेश गंभीर रूप से घायल हो गए।जैसे ही भाजपा नेता की मौत की खबर फैली, पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने गांव में जुटकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसी दौरान माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आरोपियों के दो घरों में आग लगा दी गई, कई जगह पथराव हुआ और पुलिस को भी विरोध का सामना करना पड़ा।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने दून-पांवटा साहिब हाईवे जाम करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल के साथ आईटीबीपी की तैनाती करनी पड़ी। पूरे गांव में फ्लैग मार्च किया गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।इस हिंसा और तनाव का सबसे बड़ा असर गांव के मुस्लिम परिवारों पर पड़ा। डर और असुरक्षा के माहौल के बीच 25 से अधिक मुस्लिम परिवार अपने घरों में ताले लगाकर रिश्तेदारों के यहां चले गए। कई घर खाली पड़े हैं और मोहल्लों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और हर किसी के मन में भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।वहीं प्रशासन ने भी सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों के घर और दुकानों पर बुलडोजर चलाया। प्रशासन का कहना है कि कानून अपने तरीके से काम करेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस ने इस मामले में कई नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। मुख्य आरोपी अमन, जिस पर विनोद कुमार के सिर पर हथौड़े से हमला करने का आरोप है, अभी भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर 25 से 30 अज्ञात लोगों की पहचान करने में जुटी है।लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक मामूली विवाद को समय रहते रोका जा सकता था? क्या हिंसा और आगजनी के बाद गांव में फैले डर को रोका जा सकता था? और सबसे बड़ा सवाल, क्या कानून का डर अपराधियों के मन से खत्म होता जा रहा है?फिलहाल बैरागीवाला गांव में शांति बहाल करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन विनोद कुमार की हत्या और उसके बाद हुई हिंसा ने पूरे इलाके को गहरे जख्म दे दिए हैं।