देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया है और 2025 के पहले दिए गए आदेश को ही प्रभावी बनाए रखने का निर्देश दिया है।
तीन जजों की बेंच ने की सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं।
खतरनाक और बीमार कुत्तों को लेकर टिप्पणी
रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि सड़कों पर घूम रहे खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों के मामले में आवश्यक होने पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। इसमें यह भी कहा गया कि स्थिति गंभीर होने पर उचित प्रक्रिया के तहत ऐसे कुत्तों को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
डॉग बाइट मामलों के चौंकाने वाले आंकड़े
सुनवाई के दौरान कई राज्यों के आंकड़े भी सामने रखे गए।
- राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1084 डॉग बाइट के मामले
- तमिलनाडु में चार महीनों में लगभग 2 लाख घटनाएं दर्ज होने का दावा
इन आंकड़ों ने अदालत को चिंता जताने पर मजबूर किया।
राज्यों को सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए कि:
- हर जिले में Animal Birth Control (ABC) सेंटर स्थापित किए जाएं
- नसबंदी (Sterilization) और वैक्सीनेशन कार्यक्रम को मजबूत किया जाए
- पशु कल्याण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए
साथ ही यह भी कहा गया कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
इस कथित फैसले के बाद आवारा कुत्तों के प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर बहस और तेज हो गई है। एक ओर जहां इसे लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया जा रहा है, वहीं पशु अधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है।