प्रधानमंत्री की जम्मू यात्रा पर देश की निगाहें टिकी थीं, क्योंकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद वह पहली बार जम्मू-कश्मीर की धरती पर पहुंच रहे थे। जम्मू में उन्होंने पंचायत दिवस के अवसर पर देश भर के पंचायत अधिकारियों को संबोधित किया, साथ ही केंद्र शासित प्रदेश की विभिन्न योजनाओं-परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया | इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कश्मीर एवं लद्दाख की जनता को यह संदेश दिया कि भारत सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने इन शब्दों के साथ युवाओं का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया कि आपके माता-पिता, दादा-दादी को जिन मुसीबतों का सामना करना पड़ा, उनका आपको कभी सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि वह अपने इस वचन को पूरा करके दिखाएंगे। आशा की जाती है कि उनकी इन बातों का सकारात्मक असर पड़ेगा। वैसे भी बीते कुछ समय में वहां अनेक ऐसे काम हुए हैं, जो पहले नहीं हुए। इनमें विदेश से निवेश भी शामिल है।
नि:संदेह अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदला है और यह बदलाव दिखने भी लगा है, लेकिन अभी बहुत कुछ होना शेष है। वहां देर-सबेर और संभवत: परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव तो होंगे ही, लेकिन चुनाव कराने के पहले आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम लगाने की जो चुनौती है, उससे भी पार पाना होगा। तमाम आतंकियों के सफाये के बाद भी कश्मीर में जिस तरह रह-रह कर आतंकी घटनाएं हो रही हैं, उनके चलते कश्मीरी हिंदुओं की वापसी फिलहाल संभव नहीं दिख रही। भले ही कुछ भी करना पड़े, आतंकी घटनाओ को खत्म करने के लिए इस काम को संभव बनाना होगा, तभी आतंकियों और उनके समर्थकों को यह संदेश जाएगा कि उनकी दाल गलने वाली नहीं है।
Date : 25-अप्रैल-2022
Penned by Reeta joshi