देहरादून के उत्तरांचल प्रेस क्लब में 1 अप्रैल 2026 को विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस (2 अप्रैल) की पूर्व संध्या पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम मायरा केयर फाउंडेशन द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों और वयस्कों के प्रति समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना था।
जागरूकता है सबसे जरूरी
फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी ने बताया कि भारत में ऑटिज़्म के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन जानकारी की कमी और गलत धारणाओं के कारण इन बच्चों को सही सहयोग नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसे समय पर पहचान और सही सहयोग से बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
देहरादून में बनेगा नया सेंटर
इस कार्यक्रम में फाउंडेशन ने देहरादून में एक ‘होलिस्टिक लर्निंग सेंटर’ शुरू करने की घोषणा की। यह सेंटर एक ही जगह पर कई सुविधाएं देगा।
सेंटर की मुख्य सुविधाएं:
- स्पीच, ऑक्यूपेशनल और बिहेवियरल थेरेपी
- हर बच्चे के लिए व्यक्तिगत पढ़ाई योजना (ILP)
- योग, काउंसलिंग और रोजगार प्रशिक्षण
- 2026 के अंत तक 50 बच्चों के लिए व्यवस्था
- भविष्य में गांवों के लिए मोबाइल यूनिट्स
ऑपरेशन्स हेड अनीता शर्मा ने कहा कि उनका लक्ष्य बच्चों को सिर्फ शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज से जोड़ना है।
पहाड़ी क्षेत्रों की समस्या
सह-संस्थापक डॉ. जया नवानी ने बताया कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को सही इलाज और शिक्षा नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि अगर समय पर मदद मिले तो ज्यादातर मामलों में सुधार संभव है।
सहयोग की अपील
कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन ने सरकार, कंपनियों और समाज से सहयोग की अपील की, ताकि ऑटिज़्म से प्रभावित लोगों के लिए बेहतर और समावेशी वातावरण बनाया जा सके।