लचर व्यवस्था के चलते उत्तराखंड में 13 हजार गरीब बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित रह गए। हैरानी की बात है कि विभाग ने प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश के लिए तीन मौके भी दिये।
प्रदेश के 3924 प्राइवेट स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए इस साल 34362 सीटें आरक्षित हैं। शिक्षा विभाग ने इन सीटों पर पात्र बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए 21 मार्च से 11 अप्रैल तक आवेदन मांगा। पहली बार में मात्र 17854 बच्चों को लॉटरी से स्कूल आवंटित किया जा सका. हैरान करने वाली बात यह है कि तीन बार के प्रयास के बाद भी प्राइवेट स्कूलों में आरटीई कोटे की 13654 सीटें खाली रह गईं।
अब तीन से चार महीने में कैसे पूरा होगा साल भर का कोर्स
प्रदेश में इन दिनों आरटीई के तहत बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है, जबकि चार महीने बाद एक अप्रैल 2023 से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाएगा। सवाल यह है कि नवंबर और दिसंबर में प्रवेश के बाद महज तीन से चार महीने में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे साल भर का कोर्स कैसे पूरा कर सकेंगे।
अधिकतम आय की सीमा में संशोधन जरूरी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आय प्रमाण पत्र से संबंधित शासनादेश में संशोधन की जरूरत है। मौजूदा शासनादेश वर्ष 2012 का है, जिसमें कमजोर वर्ग के लिए अधिकतम वार्षिक आय 55000 है। इतनी कम आय के प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। इस शासनादेश को संशोधित कर वार्षिक आय एक लाख की जानी चाहिए।
यह है शिक्षा का अधिकार
- 6 से 14 साल की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है।
- प्राइवेट स्कूल कम से कम 25 प्रतिशत बच्चों को बिना फीस के एडमिशन देंगे
- कक्षा एक से आठवीं तक है मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था
प्रदेश में आरटीई के तहत सीटें खाली रहने की एक वजह पलायन और आय प्रमाण पत्र सहित जरूरी प्रमाण पत्र न बन पाना है। एडमिशन के लिए निवास का प्रमाण पत्र देना होता है। वहीं अभ्यर्थी जिस क्षेत्र में निवास करता है, उसे उसी क्षेत्र के प्राइवेट स्कूल में प्रवेश की प्राथमिकता दी जाती है।
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