नींद की गोलियां दीं, कार में आग लगाई, पानी में डुबोया फिर हथौड़े से मारा,मां-बेटे का किया कत्ल !

नींद की गोलियां दीं, कार में आग लगाई, पानी में डुबोया फिर हथौड़े से मारा,मां-बेटे का किया कत्ल !
By New31 Uttarakhand

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां महिला सिपाही लता सिंह और उनके दो साल के बेटे लड्डू की मौत के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में यह घटना सड़क हादसे के रूप में दर्ज की गई थी, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि पति दान सिंह द्वारा डेढ़ करोड़ रुपये की सरकारी आर्थिक मदद हड़पने के लिए रची गई सुनियोजित हत्या थी।पुलिस के अनुसार, दान सिंह ने नैनीताल से लौटते समय बाजपुर के पास अपनी पत्नी और बेटे को कोल्डड्रिंक में नींद की गोलियां मिलाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद उसने कार को काशीपुर रोड पर डंपर से हल्की टक्कर लगवाई ताकि यह हादसा दिखाई दे।आगे की योजना के तहत दान सिंह ने अपने दो साथियों – प्रदीप और सलमान – से पेट्रोल मंगवाकर कार में आग लगा दी। आग लगने के बाद जब लता होश में आई और बाहर निकलने की कोशिश की, तो दान सिंह ने उसे पानी से डुबाने की कोशिश की।

अंत में रास्ते में हथौड़ी से हमला कर लता की हत्या कर दी। बेटे लड्डू की मौत कार में आग लगने के कारण हुई।पुलिस ने दान सिंह और उसके दो साथियों – नूर हसन और सलमान – को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि दान सिंह के रिश्तेदार रवि और प्रदीप अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने बताया कि हत्या का मुख्य उद्देश्य पत्नी और बेटे की मौत के बाद मिलने वाली सरकारी आर्थिक मदद हड़पना था। महिला सिपाही लता सिंह का खाता बैंक ऑफ़ बड़ौदा में था, और सरकारी प्रावधान के अनुसार दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में परिवार को 1 से डेढ़ करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है। इसके अलावा अन्य सरकारी भत्ते भी पति के हाथ आने थे।जानकारी के अनुसार, दान सिंह की यह दूसरी शादी थी। इससे पहले उसकी शादी रजनी से हुई थी, जिनकी 2015 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

दान सिंह किराए पर टैक्सी चलाता था। नैनीताल की यह ट्रिप उसने अपनी पत्नी और बेटे की हत्या की योजना के बहाने बनाई थी।पुलिस ने घटना की गहन जांच के दौरान कैमरा फुटेज, फोन कॉल डिटेल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या की गुत्थी सुलझाई। प्रारंभिक तौर पर यह घटना सड़क हादसा प्रतीत हो रही थी, लेकिन साक्ष्यों और अनुसंधान ने सच्चाई सामने ला दी।रामपुर में हुई यह घटना न केवल एक दुखद हत्याकांड है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलने वाली सुरक्षा राशि के दुरुपयोग का उदाहरण भी बन गई है। पुलिस ने कहा है कि सभी आरोपी जल्द पकड़े जाएंगे और मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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