उत्तराखंड में जंगल की आग की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। फायर सीजन की शुरुआत से अब तक प्रदेश में 73 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, खासकर कुमाऊं क्षेत्र के जंगलों में आग लगने के मामले सामने आए हैं।
हालांकि, वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इन घटनाओं को शून्य दर्शाया गया है, जिससे वास्तविक स्थिति और सरकारी आंकड़ों के बीच स्पष्ट अंतर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल सर्दियों में बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जंगल अत्यधिक शुष्क हो गए हैं, जिससे आग लगने की संभावना बढ़ गई है।
नवंबर 2025 से 14 फरवरी तक प्रदेश में 61 आग की घटनाएं हुईं, जिनमें लगभग 42 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। तापमान में वृद्धि के साथ ही जंगलों में आग की घटनाओं में भी इजाफा देखा गया है।
हाल ही में हुई बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली है। बारिश के कारण जंगलों में नमी बढ़ी है, जिससे आग के फैलाव को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। हालांकि, यह राहत केवल अस्थायी है और जंगलों में आग की घटनाएं अभी भी गंभीर बनी हुई हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता बरतने और आग पर तेजी से काबू पाने के लिए कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि आमजन को भी जंगलों में आग से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और आग लगने की स्थिति में तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।