बेडू पाको बारो मासा ये गीत तो आप सभी ने जरुर सुना होगा ,क्योंकि इस गीत की लोकप्रियता के चर्चे ना केवल हमारे देश में बल्कि विदेशों में भी है ,लेकिन क्या आप जानते है इस गीत से जुड़ी कुछ रोचक बातें अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते है , बेडू पाको बारो मासा ये गीत कुमाऊँनी भाषा का एक कुमाऊँनी लोक गीत, जिसे मोहन उप्रेती , बी.एम. शाह ने संगीतबद्ध किया है और बृजेंद्र लाल शाह ने लिखा है। यह कुमाऊँनी गीत 1950 के दशक की शुरुआत में बना, लिखा और पहली बार प्रदर्शित किया गया था और तब से यह पूरे उत्तराखंड में लोकप्रिय हो गया है, इससे पहले भी इसे कुमाऊं में ग्रामीणों के बीच एक पारंपरिक लोक गीत के रूप में गाया जाता था।
यह गीत भारतीय सेना की कुमाऊँ रेजीमेंट का आधिकारिक रेजीमेंट गीत भी है।वहीं इस गीत की रचना मोहन उप्रेती ने की थी ।इसे पहली बार 1952 में गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, नैनीताल में मंच पर गाया गया था । यह गीत तब लोकप्रिय हुआ जब इसे तीन मूर्ति भवन में अंतरराष्ट्रीय सभा के सम्मान में गाया गया ।बता दें की भारत के प्रधान मंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू ने इस गीत को भारत के अन्य प्रतिभागियों के बीच सर्वश्रेष्ठ लोक गीत के रूप में चुना ,और मोहन उप्रेती बेडू पाको बॉय के नाम से लोकप्रिय हुए ।
मोहन उप्रेती और नईमा खान उप्रेती ने एचएमवी के लिए इस गाने को रिकॉर्ड किया. यह गीत भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के पसंदीदा गीतों में से एक था ।बता दें की इस गीत में संगीतकार एक महिला की भावनाओं को व्यक्त करता है जो उसके प्यारे पति को उसकी माँ के घर आने का कारण बताती है। साथ ही इस गीत में संगीतकार ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध स्थनों जैसे अल्मोड़ा और नैनीताल का जिक्र किया है और साथ ही दोनों जगह की प्रसिद्ध चीजों को शामिल किया है।