“सरकारी स्कूलों की पोल न खुले, इसलिए बच्चों को ही बना दिया ‘डमी’! भाई, बच्चों को समझ क्या रखा है?”महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर एक गंभीर आरोप सामने आया है। सामाजिक ऑडिट के दौरान स्कूलों की कमियां और कमजोरियां छिपाने के लिए बच्चों को डमी छात्रों के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है।
आरोप है कि स्कूलों में छात्रों की वास्तविक संख्या और स्थिति को बेहतर दिखाने के लिए बच्चों को ऑडिट के समय छात्र के रूप में पेश किया गया। इस मामले पर अभिजीत दिपके ने अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूलों की स्थिति सुधारने के बजाय ऐसा क्यों किया जा रहा है?
सबसे बड़ा सवाल सरकार और प्रशासन से है—क्या बच्चों को सिर्फ आंकड़े पूरा करने और सरकारी सिस्टम की नाकामी छिपाने का जरिया समझ लिया गया है? बच्चे देश का भविष्य हैं, किसी सरकारी रिकॉर्ड में संख्या बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला साधन नहीं।