18 सितंबर 2022 को अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। चार साल बाद 18 सितंबर 2026 को उनकी चौथी बरसी पर एक बार फिर सड़कों पर वही सवाल गूंजे की अंकिता को पूरा न्याय कब मिलेगा और कथित VIP कनेक्शन की पूरी सच्चाई सामने कब आएगी?अंकिता मामले में कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े अपराधों में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अगस्त 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीनों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं। यानी कानूनी लड़ाई का एक बड़ा हिस्सा आगे बढ़ चुका है, लेकिन मामले से जुड़े कुछ सवालों को लेकर सार्वजनिक असंतोष अभी भी बना हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल कथित VIP कनेक्शन का है। इसी पहलू की जांच के लिए 2026 की शुरुआत में CBI ने अज्ञात VIP के खिलाफ केस दर्ज कर पुराने रिकॉर्ड खंगालने की बात सामने आई थी। 18 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा कि राज्य सरकार की सिफारिश पर CBI जांच कर रही है और जांच से सच्चाई सामने आएगी।और इसी मुद्दे को लेकर अंकिता की चौथी बरसी पर उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए।देहरादून में गांधी पार्क से घंटाघर तक न्याय यात्रा निकली। गांधी पार्क में श्रद्धांजलि सभा के बाद बड़ी संख्या में लोग हाथों में तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने लंबित सवालों के जवाब, कथित VIP की जांच और न्याय की मांग उठाई।वनंतरा रिजॉर्ट के बाहर भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और न्याय मार्च निकालकर रिजॉर्ट के गेट तक पहुंचे।
वहां अंकिता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।रामनगर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चार साल बाद भी अंकिता के परिवार और लोगों के मन में कई सवाल हैं।पौड़ी में जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रदर्शन कर सरकार पर सवाल उठाए, जबकि नई टिहरी में महिला कांग्रेस ने CBI जांच की प्रगति को लेकर सरकार का पुतला फूंका।रानीखेत में भी महिला कांग्रेस ने ‘एक दिया अंकिता के नाम’ अभियान के तहत श्रद्धांजलि दी। वहीं देहरादून में कांग्रेस मुख्यालय से कैंडल मार्च भी निकाला गया।यानी चार साल बाद तस्वीर साफ है—तीन दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन VIP कनेक्शन और उससे जुड़े सवालों का जवाब अभी जांच के दायरे में है।
अब सबसे बड़ा सवाल सरकार से यही है की जब CBI जांच की बात सामने आ चुकी है, तो इसकी प्रगति जनता के सामने आखिर कितनी पारदर्शिता से रखी जाएगी? और क्या इस जांच से उन सवालों के जवाब मिल पाएंगे, जिन्हें लेकर चार साल से उत्तराखंड की सड़कों पर आवाज उठ रही है?अंकिता के मामले में न्याय सिर्फ सजा तक सीमित है या फिर पूरी सच्चाई सामने आने तक न्याय की लड़ाई जारी रहेगी? यही सवाल अब भी उत्तराखंड के सामने खड़ा है।