बद्रीनाथ धाम में आज सुबह कपाट खुलने के साथ ही भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। बैसाख मास के पावन अवसर पर पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्ध योग में प्रातः ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान “जय बदरीविशाल” के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
इस विशेष अवसर पर पुष्कर सिंह धामी भी धाम में उपस्थित रहे और उन्होंने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। कपाट खुलने से पहले परंपरागत विधियों का विधिवत पालन किया गया, जो सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं।
तड़के करीब 4 बजे भगवान कुबेर जी का दक्षिण द्वार से प्रवेश हुआ, जिसके साथ ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। इसके बाद रावल, धर्माधिकारी और वेदपाठी, उद्धव जी की डोली के साथ मंदिर में प्रवेश कर विधिपूर्वक द्वार पूजन संपन्न किया गया।
निर्धारित समय पर कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ, जबकि पूर्वाह्न 11 बजे से गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना प्रारंभ की गई।
इस वर्ष बद्रीनाथ धाम को विशेष रूप से भव्य रूप में सजाया गया है। मंदिर परिसर और आसपास के मठ-मंदिरों को लगभग 25 कुंतल ऑर्किड, गेंदे के फूलों और फलों से सजाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र दिव्यता और आध्यात्मिक आभा से ओत-प्रोत नजर आ रहा है।
कपाट खुलने के साथ ही देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का धाम में पहुंचना शुरू हो गया है, और आगामी दिनों में यहां भारी भीड़ की संभावना जताई जा रही है। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का भी विधिवत शुभारंभ माना जा रहा है, जो उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।