उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में इन दिनों यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। बारिश के दिनों में यात्रा के दौरान भूस्खलन के कारण मार्गों का बंद होना आम बात है। इसके अलावा बरसात में सक्रिय होने वाले स्लिप जोन भी परेशानी का कारण बनते हैं। लोनिवि ने इस बार ऐसे 360 से अधिक डेंजर स्लिप जोन चिह्नित किए हैं, जो बरसात में कभी भी सक्रिय हो सकते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से निश्चित दूरी पर जेसीबी के अलावा अन्य मशीनों की व्यवस्था की गई है, ताकि वक्त रहते स्लिप के कारण बंद हुए मार्गों को खोला जा सके।
मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में कब कौन सी सड़क पर पहाड़ से गिरकर मलबा और बोल्डर आ जाएं, कहा नहीं जा सकता है। इसके अलावा बरसाती नाले भी सक्रिय हो जाते हैं, इन्हीं के साथ भारी मात्रा में स्लिप आता है, जो मार्गों के बंद होने का कारण बनता है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों के अलावा, मुख्य जिला मार्गों, स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर डेंजर स्लिप जोन सक्रिय हैं। लोनिवि की ओर से प्रदेश में सक्रिय डेंजर स्लिप जोन का निर्माण खंड के हिसाब से वर्गीकरण किया गया है।लोनिवि के अधिकारियों की मानें तो सभी संवेदनशील स्थानों पर मैनपावर के साथ मशीनों की तैनाती की गई है, ताकि कम से कम समय में बंद हुई सड़कों को खोला जा सके।