बता दें की उत्तराखंड में सूखते जलाशयों ने चिंता बढ़ा दी है। जारी रिपोर्ट में जलाशयों के सूखने का कारण जल प्रदूषण, फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित पानी, गाद भरने और स्रोतों के सिमटने को बताया गया है। इनमें से बहुत से ऐसे हैं, जिन्हें पुनर्जीवित भी नहीं किया जा सकता है। कई जलाशयों में अतिक्रमण हो चुका है.बता दें की उत्तराखंड में सूखते जलाशयों ने चिंता बढ़ा दी है।
वहीं जारी रिपोर्ट में जलाशयों के सूखने का कारण जल प्रदूषण, फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित पानी, गाद भरने और स्रोतों के सिमटने को बताया गया है। इनमें से बहुत से ऐसे हैं, जिन्हें पुनर्जीवित भी नहीं किया जा सकता है। कई जलाशयों में अतिक्रमण हो चुका है,प्रदेश में कुल 3096 जलाशय हैं। इनमें से 2970 ग्रामीण क्षेत्रों (95.9 प्रतिशत) और 126 (4.1 प्रतिशत) शहरी क्षेत्र में हैं।
साथ ही इनमें से 2371 जलाशयों (76.6 प्रतिशत) में ही पानी पाया गया है, जबकि 725 जलाशय (23.4 प्रतिशत) पूरी तरह से सूख चुके हैं। रिपोर्ट में जलाशयों के सूखने का कारण जल प्रदूषण, फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित पानी, गाद भरने और स्रोतों के सिमटने को बताया गया है। इनमें से बहुत से ऐसे हैं, जिन्हें पुनर्जीवित भी नहीं किया जा सकता है।