आखिरकार पिंजरे में कैद हुआ गुलदार , मासूम की मौत के बाद ये कैसा डरावना सच आया सामने

By New31 Uttarakhand

बता दें की देहरादून में विकासनगर के शंकरपुर में आतंक का पर्याय बना गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया। सहसपुर के शंकरपुर स्थित राम खाली के पास वन विभाग ने लगाया था, जिसमें आज बृहस्पतिवार सुबह गुलदार कैद हो गया। गुलदार को पिंजरे में कैद देख लोगों ने राहत की सांस ली। देहरादून में विकासनगर के शंकरपुर में गुलदार की टारगेट किलिंग ने शिकारियों को चौंका दिया है। शिकारियों का कहना है कि महमूदनगर बस्ती में चार साल के मासूम को मारने से पहले गुलदार ने तीन महीने पहले भी उस पर हमले की कोशिश की थी।

साथ ही आपको बता दें की इसके बाद घर में खेल रहे पांच बच्चों के बीच से गुलदार ने उसी को अपना शिकार बनाया।उनका दावा है कि एक शिकार पर दो बार हमला करने की एकमात्र घटना जिम कार्बेट की किताब में दर्ज है। इसके अलावा ऐसा कोई दूसरा मामला नहीं आया है। शिकारियों का कहना है कि पिछले नौ महीने से यह क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना हुआ है। आम लोगों की सुरक्षा के लिए गुलदार को मारना जरूरी है।हिमाचल प्रदेश के सोलन के रहने वाले आशीष दास गुप्ता के नेतृत्व वाली शिकारियों की टीम में मुरादाबाद के राजीव सोलोमन, मेरठ के सैय्यद अली बिन हादी शामिल हैं।

वहीं राजीव सोलोमन का दावा है कि ऐसी एकमात्र घटना का जिक्र जिम कार्बेट ने अपनी किताब ‘मैन ईटर ऑफ रुद्रप्रयाग’ में किया है।इसमें रुद्रप्रयाग की एक महिला का गुलदार कई दिनों तक पीछा करता रहा। बाद में रात में परिजनों के साथ सोते समय उसे उठाकर ले गया था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की परिस्थिति इस गुलदार के मामले में सामने आ रही है उससे साफ है कि वह बेहद आक्रामक है।शिकारियों का यह दल आक्रामक जानवरों के मामले में 75 सफल ऑपरेशन को अंजाम दे चुका है। वर्ष 2006 से लेकर अभी तक छह गुलदार और एक टाइगर का शिकार किया है। दो गुलदार और एक टाइगर को यह टीम ट्रैंकुलाइज कर चुकी है।

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