देवभूमि उत्तराखंड ने विश्व भर में अपनी खुबसूरत संस्कृति की एक अलग ही छाप छोड़ी है ,तभी तो दूर -दूर से लोग यहा की खूबसूरती को देखने और यहा की संस्कृति को जानने के लिए आते है ,यहा के लोग अपनी विरासत को सदियों से संजोय हुए है ,और उसका पूरा सम्मान करते है ,और उत्तराखंड के कई प्रसिद्ध कलकार ऐसे है जिन्होंने अपनी मेहनत से उत्तराखंड की संस्कृति को उचाईयों तक पहुंचाया है ,उनमे से ही कलकार है बसंती बिष्ट जिन्होंने उत्तराखंड की पहली प्रोफेशनल महिला जागर गायिका होने का गोरव हासिल किया है .
बता दें की बसंती बिष्ट पद्म श्री सम्मान से भी सम्मानित है 26 जनवरी 2017 को उन्हें इस गौरवशाली सम्मान से सम्मानित किया गया था ,बसंती बिष्ट ने ना सिर्फ नंदा देवी के जागर को विश्व पटल पर पहचान दिलाई बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी एक दुसरे से सुनकर उत्तराखंड में जो जागर चलती आ रही है ,उसको उन्होंने किताब का रूप दिया है ,ताकि आने वाली पीढ़ी इसके सीख पाए और इसे सम्भाल के रख पाए ,बता दें की बसंती बिष्ट उत्तराखंड के चमोली जिले की रहने वाली है ,और वो अपनी माँ बिरमा देवी को अपना गुरु मानती है .
बसंती बिष्ट की माँ भी बहुत अच्छा जागर गाती है ,बसंती बिष्ट ने बताया है की उन्होंने बचपन में अपनी ,माँ को जागर गाते हुए सुना था ,जिसकी वजह से उन्हें भी जागर याद होने लगे लेकिन उन्होंने कभी सोचा नही था की वो इस तरह से जागर को आगे ले जाएँगी,लेकिन उन्होंने ऐसा किया और अपनी मेहनत से उत्तराखंड की पहली प्रोफेशनल महिला जागर गायिका होने का गोरव हासिल किया और उत्तराखंड की खुबसूरत संस्कृति को उचाईयों तक पहुंचाया.