देवभूमि उत्तराखंड में वैसे तो पर्यटकों के लिए अनेक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जो बेहद रोमांच से भरे हैं, लेकिन इन्हीं के बीच फूलों की घाटी चमोली भी पर्यटकों की पहली पसंद रही है। आपको बता दें की यूनेस्को की विश्व धरोहर फूलों की घाटी चमोली बुधवार 1 जून से पर्यटकों के लिए खुल रही है। जिसके लिए पर्यटन विभाग की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं जिसके अंतर्गत प्रेरकों की सभी मूलभूत आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। फूलों की घाटी चमोली में 500 से ज्यादा जातियों के फूल देखने को मिलेंगे। सबसे खास बात तो यह है कि फूलों की घाटी नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में आती है यह फूलों से चम चमाती चम-चमाती एक ऐसी घाटी है जो ब्रिटिश काल से ही पर्यटन के लिए विशेष ख्याति प्राप्त रही है। जिसके चलते ही यूनेस्को ने वर्ष 2005 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया।
चीफ वाडल्ड लाइफ वार्डन डा. पराग मधुकर के अनुसार एक जून से फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुलने जा रही है। इसमें प्रत्येक दिन करीब चार सौ से पांच सौ लोगों को जाने की अनुमति होगी। जिसके लिए डेढ सौ रुपये का एंट्री टिकट है। जबकि 12 साल तक के बच्चों के लिए एंट्री फ्री रहेगी। बता दें कि फूलों की घाटी में ब्रह्मकमल जैसी कुछ विशेष फूलों की किस्में भी शामिल हैं, जो कि उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी है। वहीं अन्य किस्मों में ब्लू पोस्पी शामिल हैं, जिन्हें फूलों की रानी, ब्लूबेल, प्रिमुला, पोटेंटिला, एस्टर, हिमालयन ब्लू पोपी, लिलियम डेल्फीनियम और रैनुनकुलस आदि हैं। फूलों के साथ ही इस सुंदर घाटी में तेंदुए, कस्तूरी मृग और नीली भेड़ जैसी विभिन्न प्रजातियों को भी देखा जा सकता है। आपको बताते चलें कि वर्ष 1982 में एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित, फूलों की घाटी 87.50 वर्ग किमी के विस्तार में फैली हुई है।
फूलो की घाटी चमोली जिले, पुष्पावती नदी के किनारे है
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक फूलों की घाटी का नाम है, जिसे अंग्रेजी में Valley of Flowers कहते हैं। यह भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में है। यह फूलों की घाटी विश्व संगठन, यूनेस्को द्वारा सन् 1982 में घोषित विश्व धरोहर स्थल नन्दा देवी अभयारण्य नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान का एक भाग है। हिमालय क्षेत्र पिंडर घाटी अथवा पिंडर वैली के नाम से भी जाना जाता है,
युनेस्को विश्व धरोहर स्थलफूलों की घाटी (नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान) फूलों की घाटी का जन्म पिंडर से हुआ है जिसे पिंडर घाटी या भी कहते हैं। यह देवी देवताओं का निवास स्थान भी माना जाता है, जहाँ आज भी पिंडर घाटी में भगवान शिव के गण और देवताओं के वंशज निवास करते है, और हर वर्ष माता पार्वती नंदा देवी को हिमालय तक भगवान शिव के तपावस्वी स्थान तक पहुंचाने आते हैं जिसे वर्तमान में नंदा देवी यात्रा या भगवती भैट से भी जाना जाता हैं।