National Herald Case क्या है नेशनल हेराल्ड केस, कब सामने आया ये मामला, कौन हैं आरोपी, जानें सबकुछ

By New31 Uttarakhand

प्रवर्तन निदेशालय ने न्यूज़ पेपर ‘नेशनल हेराल्ड’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूछताछ के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी नेता राहुल गांधी को जून के शुरुआती हफ्ते में पेश होने के लिए समन जारी किया था…. इस मामले में सोमवार को राहुल गांधी तुगलक लेन स्थित अपने आवास से हजारों पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ईडी के दफ्तर पहुंचे…. उनसे इस मामले में पूरे तीन घंटे तक पूछताछ की गई. आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला जिसको लेकर देश भर में इतना बवाल मचा है.

National Herald Case

National Herald Case नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र आजादी के पहले का अखबार है… इस अखबार की शुरुआत इंदिरा गांधी के पिता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में की थी…नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ( Associated Journals Limited) नाम की कंपनी करती थी….इस कंपनी की स्थापना 1937 में की गई थी..आपको बता दें की नेहरू के अलावा 5000 स्वतंत्रता सेनानी इसके शेयरहोल्डर्स थे… और यह कंपनी दो और दैनिक समाचार पत्रों का प्रकाशन करती थी. उर्दू में कौमी आवाज और हिन्दी मे नवजीवन. यह कंपनी किसी एक व्यक्ति के नाम पर नहीं थी

आजादी की लड़ाई के दौरान नेशनल हेराल्ड स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज को स्थान देने वाला प्रमुख मुखपत्र बन गया..जानकारी के अनुसार इस पत्र का उद्देश्य कांग्रेस में उदारवादी धड़े के विचारों और चिंताओं और संघर्ष को मंच प्रदान करना था…. नेहरू इस अखबार में संपादकीय लिखते थे और ब्रिटिश सरकार की नीतियों की कड़ी समीक्षा, आलोचना करते. अंग्रेजी सत्ता को अखबार का ये तेवर चुभने लगा…. आखिरकार 1942 में अंग्रेजों ने इस समाचार पत्र को प्रतिबंधित कर दिया…जिसके बाद 1945 में इस अखबार को फिर से शुरू किया गया… 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली और नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने… और उन्होंने अखबार के बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया…. लेकिन अखबार का प्रकाशन जारी रहा और कई नामी पत्रकार इसके संपादक बने… ये अखबार कांग्रेस की नीतियों के प्रचार-प्रसार का मुखर जरिया बना रहा.

‘नेशनल हेराल्ड’

 साल 2008 में कांग्रेस की अगुवाई में जब यूपीए सत्ता में थी तो अखबार का प्रकाशन एक बार फिर बंद कर दिया गया. वजह बताया गया कि कंपनी वित्तीय घाटे में है और अखबार संचालन के खर्चे नहीं उठा पा रही है. 2010 में इस कंपनी के 1057 शेयर होल्डर्स थे….2011 में घाटे में चल रही इस कंपनी के होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिए गए.

आपको बता दें की ईडी ने सोनिया गांधी को 8 जून और राहुल गांधी को 13 जून को पेश होने के लिए समन जारी किया… ईडी के अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बयान दर्ज करना चाहती है… ईडी सोनिया, राहुल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ कर वित्तीय लेनदेन, यंग इंडियन के प्रवर्तकों और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की भूमिका के बारे में पता लगाना चाहती है.

ईडी ने जांच के तहत हाल ही में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल से भी पूछताछ की थी. यह मामला कांग्रेस समर्थित ‘यंग इंडियन’ में कथित वित्तीय अनियमितता की जांच के सिलसिले में हाल में दर्ज किया गया था. एक निचली अदालत की ओर से यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आयकर विभाग की जांच का संज्ञान लेने के बाद एजेंसी ने पीएमएलए के आपराधिक प्रावधानों के तहत एक नया मामला दर्ज किया था.

Date: 14-June-2022

Penned by – Tanuja Bhauryal

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