उत्तराखंड में मई के महीने में जहां आमतौर पर गर्मी रहती है, वहीं इस बार मौसम ने अचानक करवट लेकर हालात को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। रविवार को राज्य के कई हिस्सों में भीषण बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई। Dehradun जिले के त्यूणी क्षेत्र में 15 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो गए, कई घरों की छतें उड़ गईं और 50 से अधिक गांवों की बिजली गुल हो गई। खेतों में खड़ी और कटी गेहूं की फसल को करीब 50% तक नुकसान पहुंचा है, जबकि टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली और ऊधमसिंह नगर समेत कई जिलों में भी फसल, सब्जियों और पेड़ों को भारी क्षति हुई है। मौसम विभाग ने 4 और 5 मई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 4 मई को देहरादून, Haridwar, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चंपावत में भारी बारिश, तेज हवाएं, आकाशीय बिजली और ओलावृष्टि की चेतावनी है, जबकि 5 मई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी मौसम खराब रहने का अनुमान है। खासतौर पर नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और लैंडस्लाइड का खतरा भी बढ़ गया है। इस बदले हुए मौसम का सीधा असर चारधाम यात्रा पर भी पड़ता नजर आ रहा है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और खराब मौसम को देखते हुए हेली सेवाओं के संचालन पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने सभी जिलाधिकारियों के साथ आपात बैठक कर सड़कों से मलबा हटाने और यातायात सुचारु रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं Rishikesh में टिहरी बांध से पानी छोड़े जाने की आशंका को देखते हुए गंगा के बढ़ते जलस्तर पर SDRF को अलर्ट कर दिया गया है और घाटों पर श्रद्धालुओं व पर्यटकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी जा रही है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा करें, क्योंकि पहाड़ी मार्गों पर अचानक मौसम बदलने से जोखिम काफी बढ़ गया है। हालांकि तापमान में गिरावट से गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मौजूदा हालात में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।