कहते हैं कि प्यार की कोई सरहद नहीं होती और बागेश्वर के नवीन परिहार और थाईलैंड की मोरिया ने इसे सच कर दिखाया है। बागेश्वर जिले के उडल गांव के रहने वाले नवीन और मोरिया की मुलाकात करीब दो साल पहले दुबई में हुई थी, जहां दोनों शेफ के रूप में काम करते थे। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और दोनों ने जिंदगीभर साथ रहने का फैसला किया। इसके बाद विजयादशमी के अवसर पर हल्द्वानी के शीतला देवी मंदिर में दोनों ने कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए। इस अनोखी शादी में दो देशों की संस्कृतियों का खूबसूरत संगम देखने को मिला।
मोरिया के लिए कुमाऊंनी विवाह की रस्में नई थीं, लेकिन उन्होंने इन्हें समझने और निभाने में खास दिलचस्पी दिखाई। रस्मों का अर्थ समझाने के लिए अंग्रेजी अनुवादक की मदद ली गई, जबकि थाईलैंड से पहुंचे मोरिया के भाई और भाभी ने कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार कन्यादान की रस्म निभाई। नवीन के पिता पूरन सिंह परिहार और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस रिश्ते पर खुशी जताई। अब परिवार की योजना मोरिया को उनके पैतृक गांव ले जाकर उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और पहाड़ी जीवनशैली से परिचित कराने की है। दुबई में शुरू हुई यह प्रेम कहानी अब दो परिवारों और दो संस्कृतियों को एक रिश्ते में जोड़ चुकी है।