प्रादेशिक सेना में अलग-अलग पदों के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में हो रही भर्ती ने कुमाऊं के चार जिलों की परिवहन व्यवस्थाओं को तार-तार कर दिया। हल्द्वानी तक किसी तरह पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को ढाई सौ किमी. दूर पिथौरागढ़ तक पहुंचने में काफी संकट का सामना करना पढ़ रहा हैं वही ऐसी बदहाल व्यवस्थाओ के चलते अन्य राज्यों से भारी संख्या में आये अभियार्थी उत्तराखंड सरकार पर भी सवाल उठाल रहे हैं वही दूसरी तरफ कानून व्यवस्था संभाले में प्रशासन के अधिकारियों के भी पसीने छूट गए हैं। पिथौरागढ़ से दिल्ली, देहरादून जाने वाली बसों में यात्रियों को स्थान नहीं मिल पा रहा है। सेना भर्ती को लेकर पूर्व में सेना और प्रशासन की बैठक में तैयारियाें पर चर्चा तो की गई थी लेकिन युवाओं की इतनी भीड़ उमड़ पड़ेगी इसका अंदाजा किसी ने नहीं लगाया था। इसका परिणाम यह हुआ कि टनकपुर और हल्द्वानी से लेकर भर्ती केंद्र पिथौरागढ़ तक युवाओं की भीड़ नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त वाहन लगाने पड़े हैं। हजारों की संख्या में युवा पिथौरागढ़ जाने के लिए सोमवार से रुद्रपुर, हल्द्वानी, टनकपुर और चंपावत में जमा होने लगे। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, रोडवेज से लेकर केमू तक की बसें कम पड़ने लगीं।
हाल ये रहा की अभियर्थियों को ट्रक टैक्सी यहाँ तक की स्कूल बस में पिथौरागढ़ भेजा गया जिनमे लगभग 100 से अधिक बसे पिथौरागढ़ के लिए भेजी गयी इस एक भर्ती ने रुद्रपुर, हल्द्वानी, टनकपुर और चंपावत जिले में व्यवस्थाओं को इस कदर धराशायी किया कि जिला प्रशासन के अधिकारियों को रोडवेज स्टेशनों पर व्यवस्थाएं संभालने के लिए उतरना पड़ा। बिगड़ी व्यवस्था में अभ्यर्थी ही नहीं बल्कि आम लोग भी प्रभावित हुए हैं। वही दूसरे रूटों की बसें भी अभ्यर्थियों को ले जाने के लिए लगा दी गई हैं इसके बावजूद हल्द्वानी से लेकर चंपावत तक अभ्यर्थी और आम यात्री बसों के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। आपको बता दे अभी यह दौर एक सप्ताह तक और चल सकता है। कारण यह है कि अभी तो पिथौरागढ़ जा रहे अभ्यर्थियों को लौटने में भी दिक्कत होगी। वही हालात को देखते हुए पिथौरागढ़ नगर के स्कूलों में भी तीन दिन का अवकाश घोषित करना पड़ा है।