हाल ही में हुए ऑस्कर अवॉर्ड समारोह में प्रियंका चोपड़ा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने उन्हें आलोचनाओं के घेरे में ला दिया है। वीडियो में देखा गया कि जब हॉलीवुड अभिनेता जेवियर बार्डेम ने मंच से युद्ध बंद करने और फिलिस्तीन की आज़ादी की बात कही, तब प्रियंका चोपड़ा ने केवल मुस्कुराकर सिर हिलाया, लेकिन कोई बयान नहीं दिया।यूट्यूबर ध्रुव राठी ने इस वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस वीडियो को देखो प्रियंका चोपड़ा की शक्ल यहाँ पर देखने लायक थी। आप में से कुछ लोग शायद पूछ सकते हैं कि गलत क्या किया प्रियंका ने। उन्होंने चुप रहना चुना, न्यूट्रल रहीं, पॉलिटिकल नहीं होना चाहती थीं। लेकिन यही तो दिक्कत है। न्यूट्रैलिटी की जो पोजीशन है, वो एक प्रिविलेज की पोजीशन है।”ध्रुव ने आगे कहा कि हॉलीवुड सितारे भी प्रिविलेज में रहते हैं, उनके घरों पर बम नहीं गिर रहे हैं, फिर भी वे बड़े मंचों पर मोरल स्टैंड लेते हैं। उन्होंने इस पर जोर दिया कि इंसानियत के लिए ऐसे मौके महत्वपूर्ण हैं और लोगों को सही बात कहने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
ध्रुव राठी की इस पोस्ट ने बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ पर एक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे बड़े मंचों पर मोरल स्टैंड लेने से डरते हैं या अपनी छवि और पावर कनेक्शन को प्रभावित नहीं करना चाहते। उनके अनुसार, कई स्टार्स अपने पीआर और स्पॉन्सरशिप संबंधों की वजह से किसी भी राजनीतिक या संवेदनशील मुद्दे पर सीधे तौर पर बयान देने से पहले कई बार सोचते हैं।सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा की चुप्पी को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कुछ लोग उनका न्यूट्रैलिटी का फैसला समझ रहे हैं, जबकि अन्य इसे एक प्रिविलेज की पोजीशन के रूप में देख रहे हैं।ध्रुव राठी के शब्दों में, “इंसानियत की खातिर, बड़े मंच पर सही बात कहना जरूरी है। सिर्फ चुप रहकर आप अपनी प्रिविलेज का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन यह सच्चाई को नहीं बदलता।”इस घटना ने न केवल प्रियंका चोपड़ा की छवि पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बॉलीवुड में ऐसे बड़े मुद्दों पर स्टार्स की भूमिका और उनकी सोशल जिम्मेदारी पर भी बहस शुरू कर दी है।