केदारनाथ दर्शन के बाद अचानक लापता हुई प्रज्ञा सिंह… 6 दिन तक परिवार की सांसें अटकी रहीं, पुलिस हर सुराग खंगालती रही, और हर किसी को यही डर था कि कहीं उसके साथ कोई अनहोनी न हो गई हो। लेकिन अब जब प्रज्ञा मिली हैं, तो जो सच सामने आया है उसने सबको हैरान कर दिया। यह कोई अपहरण नहीं था, बल्कि पति से हुए एक झगड़े के बाद लिया गया ऐसा फैसला था, जिसने पूरे परिवार को गहरे तनाव में डाल दिया। मिली जानकारी के अनुसार , कानपुर की रहने वाली 29 वर्षीय प्रज्ञा सिंह की कुछ ही महीने पहले लव मैरिज हुई थी और वो अपने पति के साथ केदारनाथ दर्शन कर देहरादून से गाजियाबाद जाने वाली नंदा देवी एक्सप्रेस से घर लौट रही थीं। सफर के दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। बताया जा रहा है कि इसी नाराज़गी में जब उसका पति सो गया , तो प्रज्ञा अचानक ट्रेन से उतर गईं और बिना किसी को बताए दूसरी ट्रेन में सवार हो गईं। उसे यह तक नहीं पता था कि वह ट्रेन किस दिशा में जा रही है, और इसी तरह वह बिहार के बेगूसराय पहुंच गईं। इस दौरान उसका मोबाइल फोन बंद रहा, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई।
पति ने ट्रेन में हर जगह तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और कई तकनीकी माध्यमों से लगातार जांच की। पूरे 6 दिन तक परिवार बेहद तनाव में रहा, हर पल किसी अनहोनी के डर में डूबा रहा। आखिरकार प्रज्ञा ने बिहार पहुंचकर अपनी मां को फोन किया और बताया कि वह सुरक्षित हैं, जिसके बाद पुलिस ने उसे सकुशल बरामद कर परिवार को सौंप दिया। हालाकि इस घटना से एक बड़ा सबक भी मिलता है—गुस्से या भावनाओं में लिया गया एक छोटा फैसला, अपनों के लिए कितनी बड़ी चिंता और परेशानी का कारण बन सकता है। अगर प्रज्ञा ने उस वक्त अपने परिवार को सिर्फ एक संदेश या कॉल कर दिया होता, तो शायद 6 दिनों तक चला यह डर, पुलिस की मशक्कत और परिवार का दर्द टल सकता था। यह घटना सिर्फ एक गुमशुदगी की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों में संवाद की अहमियत और भावनाओं पर नियंत्रण रखने की भी सीख देती है।