उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की जिन 10 विधानसभा सीटों पर सबसे अधिक वोटर डिलीट हुए हैं, उनमें छह सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चार सीटें कांग्रेस के कब्जे वाली हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ये नाम मृत मतदाताओं, दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके लोगों, डुप्लीकेट एंट्री और अन्य निर्धारित कारणों के आधार पर हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।
हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद राजनीतिक दलों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट गया है तो उसे समय रहते दोबारा जुड़वाने का मौका मिलना चाहिए। वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम हटे हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में हुए ये बदलाव कई विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।