पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर संयुक्त एयर स्ट्राइक की, जिसमें ईरान के लगभग 30 शहरों को निशाना बनाया गया। इस हमले का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया जा रहा है।जवाब में ईरान ने ऑपरेशन “फतह-ए-जंग” के तहत मिडिल ईस्ट के 8 से अधिक देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घोषणा की। ईरानी मिसाइलों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, वहीं कई शहरों में आवासीय और नागरिक इलाकों में मलबा गिरा। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।संयुक्त अरब अमीरात में दुबई और अबू धाबी के कई हिस्सों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद हवाई अड्डे पर सभी उड़ानें अगले आदेश तक निलंबित कर दी गई हैं।
दुबई के पाम जुमेराह स्थित फेयरमोंट होटल पर मिसाइल हमले के बाद आग लग गई। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में होटल के एक बड़े हिस्से में आग और आसमान में उठते धुएं का गुबार दिखाई दे रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने ताड़ के पेड़ों के पास घना काला धुआं और घटनास्थल की ओर तेजी से जाती एम्बुलेंसें देखीं।दुबई, जो मध्य पूर्व का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है और जहां दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा स्थित है, वहां के निवासियों ने आसमान में मिसाइलों को तेजी से उड़ते हुए देखा। खबर है कि सुरक्षा कारणों से बुर्ज खलीफा को खाली कर दिया गया।ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों के कारण कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में भी हवाई रक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गईं।यूएई सरकार ने अबू धाबी में एक नागरिक की मौत की पुष्टि की है। वहीं, दुबई में पर्यटक पूल के किनारे भागते हुए दिखाई दिए, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इजराइल पर भी कई बार मिसाइल हमले किए गए और देशभर में सायरन बजाए गए।विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं है। मिडिल ईस्ट में तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में रुकावट और सुरक्षा चिंताओं के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।कुल मिलाकर, अमेरिका और इजराइल के हमलों और ईरान के जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में पहले से ही बढ़ते तनाव को और गहरा कर दिया है। दुबई, अबू धाबी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है, और वैश्विक स्तर पर इसके आर्थिक और राजनीतिक असर को लेकर चिंता जताई जा रही है।