उत्तराखंड के क्रिकेट ही नहीं, बल्कि खेल जगत में हड़कंप मच गया है. इस बार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड गंभीर विवाद में उलझ गई है और उसके सात पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज हो गया है. एक युवा क्रिकेट खिलाड़ी से 10 लाख रुपये की मांग करने और उसके साथ मारपीट के आरोप में संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के बाद राज्य की खेल मंत्री को इस मामले में चुप्पी तोड़नी पड़ी है. अब उनका कहना है कि इस मामले को बीसीसीआई तक भी ले जाया जाएगा।

दरअसल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का विवादों से हमेशा नाता रहा है. खिलाड़ियों को सुविधा न देना या खिलाड़ियों का शोषण करने जैसे मामले आए दिन सामने आते रहे हैं. पिछले दिनों ही खिलाड़ियों को 100 रुपये प्रतिदिन भत्ता दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ा था. अब एक और गंभीर मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया है. एसोसिएशन के सचिव महिम वर्मा, मनीष झा, नवनीत मिश्रा, पीयूष रघुवंशी, सत्यम शर्मा, संजय गुसाईं, पारुल के खिलाफ जबरन वसूली, मारपीट जैसे गंभीर आरोपों में केस दर्ज हुआ है।
क्रिकेट खिलाड़ी आर्य सेठी के पिता वीरेंद्र सेठी ने थाना बसंत विहार में मुकदमा दर्ज करवाया है. सेठी का आरोप है कि उनके बेटे को खेलने के लिए एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने 10 लाख रुपये डिमांड की थी. पैसे न दिए जाने पर आर्य के साथ गाली गलौज और मारपीट की गई. उसे टीम में खेलने से रोका गया. सेठी का कहना है कि पहले एसोसिएशन के सचिव से शिकायत की गई थी, लेकिन महिम वर्मा ने भी बिना पैसे के खिलवाने से मना कर दिया।
इस बारे मेखेल मंत्री रेखा आर्य का कहना है कि भले ही क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड बीसीसीआई के अधीन काम करती है, लेकिन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पूरे मामले में जांच करवाने के साथ ही बीसीसीआई से भी इस मामले में बात की जाएगी।