पिछले दो लोकसभा चुनाव में हार के क्रम को तोड़कर तीसरे चुनाव में जीतने और खाता खोलने का दबाव प्रमुख विपक्षी दल पर पहले से ही बना हुआ है। ऐसे में लगातार कांग्रेस के कई नेता बीच में ही हाथ झटक कर पार्टी का साथ छोड़ रहे है। लोक सभा चुनाव के इतने नजदीक आने पर भी ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिस कारण 18वीं लोकसभा के चुनाव के अवसर पर उत्तराखंड में कांग्रेस की मुश्किलें आये दिन बढ़ते दिखाई दे रही है। जिन सूरमाओं पर कांग्रेस को भरोसा था वो ही एक एक कर विपक्ष का दामन थाम रहे है। आश्चर्यजनक बात यह भी है कि जिन नेताओं के जाने का पूर्वाभास पार्टी को पहले से था, उन्हें मनाने अथवा रोकने के लिए इस बार समय रहते डैमेज कंट्रोल के प्रयास धरातल पर दिखाई नहीं दिए।
जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत लगा रही पार्टी के सामने ऐसी परिस्तिथी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों में बड़े नेताओं का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाना कांग्रेस के चुनाव जीतने की संभावना के दृष्टिगत किसी सदमे से कम नहीं है। गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में पार्टी को तब बड़ा झटका लगा, जब इस क्षेत्र के एकमात्र विधायक राजेंद्र भंडारी ने पार्टी छोड़ दी।
लगातार नेताओ के कांग्रेस पार्टी छोड़ने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि भाजपा में जाने वाले कांग्रेस नेता विभिन्न कारणों से भयभीत हैं। विधायक एवं पूर्व विधायकों के जाने से पार्टी पर प्रभाव पड़ता ही है, लेकिन इससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर भी उपलब्ध हो रहा है। पार्टी इस स्थिति से उबरने का प्रयास कर रही है। इसके लिए कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। साथ ही कांग्रेस छोड़कर जो भी सत्ताधारी दल के साथ जा रहे हैं, उसके पीछे के सच को जनता के सामने लाया जाएगा।