लंबे समय तक चले आंदोलन, भूख हड़ताल, लाठीचार्ज और हजारों छात्रों के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार और CJP के बीच बातचीत का पहला अहम नतीजा सामने आया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में सरकार ने आंदोलनकारियों की दो प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। बैठक के बाद मिली जानकारी के अनुसार, आंदोलन के दौरान प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। हालांकि, आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अब भी कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार का कहना है कि शेष मांगों पर बातचीत जारी रहेगी और सभी मुद्दों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल मुआवजे या मुकदमे वापस लेने तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य जवाबदेही तय करना, शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकना है।