देहरादून में सड़क चौड़ीकरण के लिए हजारों पेड़ो को काटने काम शुरू किया गया है इसके विरोध में कई गैर सरकारी संगठन खड़े हो गए है |
जिस राज्य में हरियाली बचाने के लिए सालों पहले गौरा देवी ने चिपको आंदोलन शुरू किया था |1974 में पर्यावरण को बचाने की मुहीम चिपको आन्दोलन के रूप में चमोली जिले में गोपेश्वर के रैनी गाँव से शुरू हुयी थी जिसमे गौरा देवी ने गाँव की महिलाओ के साथ मिलकर जंगलो को बचाने के लिए जागरूक किया| और पेड़ो को गले लगाकर वनों की कटाई के विरोध में समर्थन दिया था| इस आन्दोलन को शिखर पर पहुचाने में पर्यावरणविद सुदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |
और आज उसी उत्तराखंड में विकास के नाम पर पेड़ो को कटा जा रहा है
दिल्ली-देहरादून राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत एलीवेटेड रोड का विकास किया जा रहा है।
जिसके लिए हजारों की संख्या में पेड़ को काटा जा रहा है | इस परियोजना से दिल्ली और देहरादून के बीच का सफ़र आसान हो जायेगा|
इस पूरे क्षेत्र में वन्यजीवों के तमाम कारीडोर भी हैं। कई बार सड़क पार करते समय वन्यजीव वाहनों से टकरा जाते हैं।
एलिवेटेड रोड बनने के बाद वाहन ऊपर से गुजरेंगे और
वन्यजीव नीचे आराम से विचरण कर पाएंगे। परियोजना में वन संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है| इसमें मोहंड क्षेत्र में बसे दर्जनों वन गुर्जरों के डेरों को भी शिफ्ट करने के आदेश हैं
इसलिए एनजीओ कार्यकर्ताओं ने अभियान में वन गुर्जरों को भी शामिल कर लिया है।
यंग इंडियंस देहरादून चैप्टर ने जलवायु परिवर्तन पहल के तहत देहरादून में तीन मियावाकी वन बनाने की घोषणा की है। जो की जापानी वनीकरण विधि है |
साथ ही यंग इंडियंस देहरादून चैप्टर ने नौ स्कूलों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा कांवली स्लम क्षेत्र के 10 बच्चों की शिक्षा को प्रायोजित करने की भी घोषणा की गई।
जिसका उद्देश्य स्कूलों के साथ काम कर प्रत्येक बच्चे को स्वतंत्र, सुरक्षित, खुश, समावेशी और जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सके।
Date : 30th March 2022
Edited by News 31 Uttarakhand Team